रूस, अमेरिका और भारत की मिसाइल, एआई फोटो
World Long Range Missiles: वर्तमान में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने पूरी दुनिया का ध्यान आधुनिक युद्ध तकनीक की ओर खींच लिया है। इस तनावपूर्ण माहौल में लंबी दूरी की मिसाइलें किसी भी देश की सैन्य शक्ति का सबसे बड़ा पैमाना बनकर उभरी हैं। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि महाद्वीपों के बीच मार करने की क्षमता रखने वाली ये मिसाइलें न केवल युद्ध का रुख मोड़ सकती हैं, बल्कि रक्षा प्रणालियों के लिए भी बड़ी चुनौती पेश करती हैं।
मिसाइल तकनीक और मारक क्षमता के मामले में रूस वर्तमान में विश्व में शीर्ष पर है। रूस के पास RS-28 Sarmat मिसाइल है जिसे पश्चिम में अक्सर ‘Satan II’ के नाम से जाना जाता है। इस अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) की मारक क्षमता अविश्वसनीय रूप से 18,000 किलोमीटर तक है। यह मिसाइल एक साथ कई परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है और इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह दुनिया की सबसे एडवांस्ड एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भी चकमा दे सके।
चीन भी इस दौड़ में पीछे नहीं है। उसकी DF-41 मिसाइल की रेंज 12,000 से 15,000 किलोमीटर के बीच होने का अनुमान है, जो इसे एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक सटीक निशाना साधने में सक्षम बनाती है। वहीं, अमेरिका अपनी LGM-30 Minuteman III प्रणाली के जरिए अपनी धाक जमाए हुए है, जिसकी रेंज 13,000 से 14,000 किलोमीटर है। इसके अलावा, अमेरिका और ब्रिटेन Trident II D5 मिसाइल का भी उपयोग करते हैं, जो पनडुब्बी से लॉन्च की जाती है और 12,000 किलोमीटर तक मार कर सकती है।
हथियारों की इस रेस में उत्तर कोरिया ने अपनी Hwasong श्रृंखला (विशेषकर Hwasong-15, 17 और 18) के साथ दुनिया को चौंका दिया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन मिसाइलों की क्षमता 13,000 किलोमीटर से भी अधिक हो सकती है जो इसे एक गंभीर वैश्विक खिलाड़ी बनाती है।
भारत आज दुनिया के उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल है जिनके पास शक्तिशाली लंबी दूरी की मिसाइल क्षमताएं हैं। भारत की सबसे ताकतवर मिसाइल अग्नि-V (Agni-V) की आधिकारिक रेंज 5,000 से 5,500 किलोमीटर से अधिक बताई जाती है। हालांकि, कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी वास्तविक क्षमता 7,000 किलोमीटर तक हो सकती है।
इतना ही नहीं, भारत की अग्नि-5 मिसाइल करीब 29,400 किमी प्रति घंटे की तेज रफ्तार से अपने लक्ष्य तक पहुंचती है। इसकी गति दुनिया की कई अन्य बैलिस्टिक मिसाइलों की तुलना में काफी अधिक मानी जाती है। यही वजह है कि अत्याधुनिक और उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम के लिए भी इसे इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल माना जाता है। इसके साथ ही भारत, अपनी डिफेंस क्षमताओं को और विस्तार दे रहा है। अग्नि-VI जैसी आधुनिक परियोजनाएं अभी विकास के चरण में हैं जो भविष्य में भारत को लंबी दूरी की मिसाइल बादशाहत में और ऊपर ले जाएंगी।
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ब्रह्मोस दुनिया की सबसे खतरनाक मिसाइलों में से एक मानी जाती है जिसे भारत और रूस ने मिलकर तैयार किया है। इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मॉस्कवा नदी के नामों को जोड़कर रखा गया है। यह एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है जो मैक 2.8 से 3 (करीब 3400 किमी प्रति घंटा) की रफ्तार से उड़ान भरती है।
इसकी मारक क्षमता लगभग 450 से 500 किलोमीटर तक है। इसे जमीन, समुद्र और हवा तीनों प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है। भारतीय नौसेना के कई युद्धपोत, थलसेना की मोबाइल लॉन्च प्रणालियां और वायुसेना के सुखोई Su-30MKI लड़ाकू विमान इस मिसाइल से लैस हैं।