ट्रंप-जिनपिंग की महामुलाकात, क्या US-चीन की ‘दोस्ती’ भारत के लिए बनेगा बड़ा खतरा? जानें सबकुछ
Trump Xi Jinping Meeting: करीब 9 साल बाद किसी अमेरिकी राष्ट्रपति का चीन दौरा हो रहा है। जानें कैसे ट्रंप और शी जिनपिंग की यह मुलाकात भारत की रणनीतिक अहमियत को प्रभावित कर सकती है।
- Written By: अमन उपाध्याय
Trump Xi Jinping Meeting India Impact: दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों, अमेरिका और चीन के बीच करीब 9 साल के लंबे इंतजार के बाद एक ऐतिहासिक शिखर वार्ता होने जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले हफ्ते बीजिंग पहुंचकर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। यह मुलाकात केवल एक कूटनीतिक दौरा नहीं है बल्कि इसे 21वीं सदी की सबसे बड़ी जियोपॉलिटिकल बाजी माना जा रहा है, जिसने नई दिल्ली की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
भारत की रणनीतिक अहमियत पर संकट?
विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती नजदीकी का एक बड़ा कारण चीन को रोकने की साझा रणनीति रही है। अमेरिका को एशिया में चीन के खिलाफ भारत जैसा मजबूत लोकतांत्रिक साझेदार चाहिए था। यदि वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच रिश्ते सामान्य होते हैं, तो अमेरिका की भारत पर रणनीतिक निर्भरता कम हो सकती है। जिससे भारत की ‘स्ट्रेटेजिक वैल्यू’ कम होने का अंदेशा है। चर्चा यह भी है कि क्या अमेरिका फिर से चीन के करीब जाकर भारत को महज एक ‘यूज एंड थ्रो’ पार्टनर बना देगा।
चीन प्लस वन रणनीति और निवेश का डर
आर्थिक मोर्चे पर भारत फिलहाल ‘चीन प्लस वन’ रणनीति का सबसे बड़ा लाभार्थी है। जहां Apple जैसी दिग्गज कंपनियां अपना निवेश चीन से भारत की ओर मोड़ रही हैं। भारत की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि ट्रंप और जिनपिंग के बीच व्यापारिक समझौता होता है तो क्या ये कंपनियां दोबारा चीन का रुख करेंगी?
Trump Xi Jinping Meeting India Impact: दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों, अमेरिका और चीन के बीच करीब 9 साल के लंबे इंतजार के बाद एक ऐतिहासिक शिखर वार्ता होने जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले हफ्ते बीजिंग पहुंचकर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। यह मुलाकात केवल एक कूटनीतिक दौरा नहीं है बल्कि इसे 21वीं सदी की सबसे बड़ी जियोपॉलिटिकल बाजी माना जा रहा है, जिसने नई दिल्ली की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
भारत की रणनीतिक अहमियत पर संकट?
विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती नजदीकी का एक बड़ा कारण चीन को रोकने की साझा रणनीति रही है। अमेरिका को एशिया में चीन के खिलाफ भारत जैसा मजबूत लोकतांत्रिक साझेदार चाहिए था। यदि वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच रिश्ते सामान्य होते हैं, तो अमेरिका की भारत पर रणनीतिक निर्भरता कम हो सकती है। जिससे भारत की ‘स्ट्रेटेजिक वैल्यू’ कम होने का अंदेशा है। चर्चा यह भी है कि क्या अमेरिका फिर से चीन के करीब जाकर भारत को महज एक ‘यूज एंड थ्रो’ पार्टनर बना देगा।
चीन प्लस वन रणनीति और निवेश का डर
आर्थिक मोर्चे पर भारत फिलहाल ‘चीन प्लस वन’ रणनीति का सबसे बड़ा लाभार्थी है। जहां Apple जैसी दिग्गज कंपनियां अपना निवेश चीन से भारत की ओर मोड़ रही हैं। भारत की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि ट्रंप और जिनपिंग के बीच व्यापारिक समझौता होता है तो क्या ये कंपनियां दोबारा चीन का रुख करेंगी?
