बंग्लादेश की पहली महिला प्रधामंत्री Khaleda Zia का क्या था ‘भारतीय कनेक्शन’?
Khaleda Zia India Connection: बांग्लादेश की पूर्व पीएम खालिदा जिया का निधन हो गया है। जलपाईगुड़ी (भारत) में जन्मी खालिदा तीन बार पीएम रहीं, लेकिन भारत के साथ उनके रिश्ते हमेशा चुनौतीपूर्ण बने रहे।
- Written By: प्रिया सिंह
जलपाईगुड़ी जन्मी बांग्लादेश की पूर्व पीएम खालिदा जिया का निधन (सोर्स-सोशल मीडिया)
Bangladesh First Female Prime Minister Life: बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की अध्यक्ष बेगम खालिदा जिया का मंगलवार (30 दिसंबर, 2025) को निधन हो गया। 80 वर्ष की आयु में उन्होंने ढाका के एवरकेयर अस्पताल में अंतिम सांस ली, जहां वे पिछले कई हफ्तों से लिवर सिरोसिस और हृदय संबंधी बीमारियों से जूझ रही थीं।
खालिदा जिया का निधन ऐसे समय में हुआ है जब बांग्लादेश फरवरी 2026 के आम चुनावों की तैयारी कर रहा है। उनके जाने से न केवल बांग्लादेशी राजनीति में एक शून्य पैदा हुआ है, बल्कि उनके साथ जुड़ा भारत का ऐतिहासिक कनेक्शन भी चर्चा में आ गया है।
भारत के जलपाईगुड़ी में हुआ था जन्म
खालिदा जिया का भारत से गहरा और जन्मजात संबंध था। उनका जन्म 15 अगस्त, 1945 को ब्रिटिश भारत के बंगाल प्रेसीडेंसी के जलपाईगुड़ी (वर्तमान पश्चिम बंगाल) में हुआ था। उनके पिता, इस्कंदर मजूमदार, जलपाईगुड़ी में एक चाय व्यवसायी थे।
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1947 में भारत के विभाजन के बाद उनका परिवार पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के दिनाजपुर में जाकर बस गया। हालांकि उनका राजनीतिक झुकाव अक्सर ‘भारत विरोधी’ माना गया, लेकिन उनकी जड़ें इसी मिट्टी से जुड़ी थीं।
तीन बार बनीं प्रधानमंत्री, बदला इतिहास
1960 में सैन्य अधिकारी जियाउर रहमान से शादी के बाद वे राजनीति से दूर रहीं, लेकिन 1981 में पति की हत्या ने उन्हें सत्ता के केंद्र में ला खड़ा किया। 1991 में वे पहली बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनीं और देश में संसदीय लोकतंत्र की बहाली की।
अपने तीन कार्यकालों के दौरान उन्होंने महिला शिक्षा के लिए अभूतपूर्व कार्य किए। उनके कट्टर और समझौता न करने वाले स्वभाव के कारण उन्हें ‘बैटलिंग बेगम’ भी कहा जाता था।
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भारत के साथ रहे चुनौतीपूर्ण संबंध
खालिदा जिया और उनकी पार्टी BNP का भारत के साथ रिश्ता हमेशा अविश्वास और तनाव से भरा रहा। उनके शासनकाल के दौरान भारत ने पूर्वोत्तर राज्यों के उग्रवादियों को बांग्लादेशी धरती पर पनाह मिलने का आरोप लगाया था।
हालांकि, 2012 में उनकी दिल्ली यात्रा के दौरान रिश्तों को सुधारने की कोशिश की गई, लेकिन कूटनीतिक कड़वाहट बनी रही। उनके निधन के बाद अब उनके बेटे तारिक रहमान के नेतृत्व में भारत और बांग्लादेश के संबंधों की नई दिशा पर दुनिया की नजरें टिकी हैं।
