अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
JD Vance Hungary Visit Viktor Orban Election: पश्चिम एशिया में ईरान के साथ बढ़ते युद्ध के खतरों और शांति वार्ताओं के शोर के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का एक नया कदम दुनिया भर के राजनयिकों को हैरान कर रहा है। जेडी वेंस ईरान संकट से जुड़ी महत्वपूर्ण चर्चाओं को छोड़कर अचानक हंगरी पहुंचे हैं।
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर है लेकिन ट्रंप प्रशासन के लिए हंगरी की राजनीति में अपने सहयोगी को बचाना कहीं अधिक प्राथमिकता वाला विषय नजर आ रहा है।
हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान साल 2010 से लगातार सत्ता पर काबिज हैं इस बार अपनी सबसे कठिन राजनीतिक परीक्षा का सामना कर रहे हैं। वह लगातार पांचवीं बार प्रधानमंत्री बनने की कोशिश में हैं लेकिन सर्वेक्षणों के नतीजे उनके पक्ष में नहीं दिख रहे हैं।
ओर्बान की पार्टी ‘फिडेस्ज’ को इस बार पीटर मैग्यार के नेतृत्व वाली ‘तिस्जा पार्टी’ से कड़ी टक्कर मिल रही है जो कई सर्वे में ओर्बान की पार्टी से दो अंकों की बढ़त बनाए हुए है। ट्रंप प्रशासन इस बात को भली-भांति समझता है कि ओर्बान का हारना यूरोप में उनके सबसे मजबूत दक्षिणपंथी साथी का खोना होगा इसलिए वेंस को सीधे चुनाव प्रचार के मैदान में उतारा गया है।
विक्टर ओर्बान को दुनिया भर में दक्षिणपंथी राजनीति के एक बड़े स्तंभ के रूप में देखा जाता है। डोनाल्ड ट्रंप और उनके ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ (MAGA) समर्थकों के बीच ओर्बान की नीतियां काफी लोकप्रिय हैं। इमिग्रेशन का सख्त विरोध, मीडिया और शिक्षा संस्थानों पर कड़ा नियंत्रण और LGBTQ+ अधिकारों में कटौती जैसी नीतियों के कारण ओर्बान ट्रंप प्रशासन के चहेते बने हुए हैं।
यही कारण है कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी पहले बुडापेस्ट का दौरा किया था और कहा था कि ट्रंप ओर्बान की सफलता को अपनी निजी जीत की तरह देखते हैं।
जेडी वेंस का यह दौरा इसलिए भी विवादों में है क्योंकि ओर्बान के रूस के साथ संबंध काफी गहरे माने जाते हैं। हाल ही में एक लीक हुई बातचीत से खुलासा हुआ है कि ओर्बान और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के बीच काफी नजदीकियां हैं। ओर्बान ने पुतिन से यहां तक कहा था कि वह यूक्रेन युद्ध खत्म कराने में ‘चूहे की तरह’ उनकी मदद कर सकते हैं। पुतिन ने भी यूक्रेन युद्ध पर ओर्बान के ‘संतुलित’ रुख की तारीफ की है।
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गौरतलब है कि हंगरी ने यूरोपीय संघ के दबाव के बावजूद रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखा है जिसके लिए ट्रंप के हस्तक्षेप के बाद अमेरिका ने उन्हें प्रतिबंधों से छूट भी दिलाई थी। इस दौरे से यह स्पष्ट संदेश जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन के लिए वैश्विक युद्धों से अधिक महत्वपूर्ण उन नेताओं की रक्षा करना है जो उनकी विचारधारा का समर्थन करते हैं। अब देखना यह होगा कि वेंस की मौजूदगी ओर्बान की डूबती नैया को पार लगा पाती है या नहीं।