
जकार्ता की मस्जिद में बम विस्फोट मामला (सोर्स- सोशल मीडिया)
Bomb Blast at Mosque in Jakarta: इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता के एक स्कूल की मस्जिद में 7 नवंबर को हुए धमाके की जांच में पता चला है कि इसके पीछे 17 वर्षीय एक छात्र था। पुलिस ने बताया कि उसने हमले से पहले अपनी 42-पेज की डायरी में कई परेशान करने वाली बातें लिखी थीं। डायरी में उसने अकेलेपन, गुस्सा और आत्मघाती प्रवृत्तियों के बारे में विस्तार से लिखा था।
इंडोनेशियाई मीडिया आउटलेट्स ‘कोम्पास’, ‘दीटिक’ और ‘जकार्ता पोस्ट’ के मुताबिक, छात्र लंबे समय से मानसिक रूप से अस्थिर था और ऑनलाइन चरमपंथी सामग्री पढ़ रहा था। उसकी डायरी, जिसका शीर्षक ‘डायरी रेब’ था, में मस्जिद का नक्शा, बम रखने की जगह, प्रवेश मार्ग और धमाके का सबसे प्रभावी समय जैसी योजनाएं शामिल थीं। स्थानीय मीडिया ने बताया कि डायरी हमले का फुल प्रूफ खाका प्रस्तुत करती थी।
पुलिस और रिश्तेदारों ने बताया कि छात्र निम्न-आय वर्ग का था। उसके पिता एक कैटरिंग कंपनी में रसोइए हैं और परिवार उत्तरी जकार्ता के एक दो-मंजिला मकान में रहता था, जो कंपनी मालिक की संपत्ति थी। माता-पिता के तलाक के बाद वह बहुत अकेला हो गया और लंबे समय तक अपने कमरे में इंटरनेट पर समय बिताता रहा। इसी दौरान वह एक अंतरराष्ट्रीय टेलीग्राम समूह का हिस्सा बन गया, जहाँ व्हाइट सुप्रीमेसी, क्राइस्टचर्च हमला और कोलंबाइन शूटिंग जैसी घटनाओं का महिमामंडन देखा।
इंडोनेशियाई पुलिस ने बताया कि छात्र ने घर पर ही सात छोटे बम बनाए, जिनमें बैटरी, धातु की कीलें, वायरिंग और रिमोट शामिल थे। चार बम फटे जबकि तीन कामयाब नहीं हुए। जांच से यह स्पष्ट हुआ कि यह हमला किसी संगठित नेटवर्क का हिस्सा नहीं था, बल्कि “लोन-वुल्फ” शैली की घटना थी, जो अकेलेपन और ऑनलाइन कट्टर विचारधारा से प्रेरित थी।
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जांच में यह भी सामने आया कि उसके फोन और लैपटॉप में कई वीडियो और चैट मिलीं, जिनमें हिंसा को असाधारण कृत्य बताया गया। छात्र महीनों से ऐसे डिजिटल माहौल में फंसा था, जिसमें उसे लगता था कि हिंसक कार्रवाई ही उसकी पहचान और अस्तित्व को साबित कर सकती है। हालांकि उसके द्वारा किए गए हमले में किसी की भी जान नहीं गई थी, लेकिन 50 से अधिक लोग बुरी तरह से घायल हो गए थे।
एजेंसी इनपुट से साथ-






