सीरिया के एक 'कमांड सेंटर' और हथियार डिपो पर इजरायल का हमला, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Israel Iran War Latest News: मध्य पूर्व में तनाव अब अपने सबसे खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद अब यह जंग और विकराल रूप लेती जा रही है। युद्ध के 20वें दिन इजरायल ने अब एक नया मोर्चा खोलते हुए दक्षिणी सीरिया में भीषण सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हालात जिस दिशा में बढ़ रहे हैं दुनिया एक बड़े महायुद्ध की ओर धकेली जा रही है।
इजरायली रक्षा बल (IDF) ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि उन्होंने सीरिया के सुवैदा इलाके में बड़ी कार्रवाई की है। सूत्रों के अनुसार, ड्रूज समुदाय पर हुए हमलों के जवाब में इजरायल ने सीरियाई शासन से जुड़े सैन्य कैंपों और कमांड मुख्यालयों को निशाना बनाया। जिस तरह फिल्म ‘धुरंधर’ में नायक हमजा ने सीमाओं को लांघकर दुश्मनों का सफाया किया था इजरायली सेना भी उसी मोड में नजर आ रही है और सीरिया के भीतर घुसकर युद्ध संसाधनों को नष्ट कर रही है।
ईरान-इजरायल युद्ध का सबसे भयावह पहलू ऊर्जा बुनियादी ढांचों पर हो रहे हमले हैं। इजरायल ने ईरान के सबसे महत्वपूर्ण पार्स गैस साइट पर हमला कर उसे भारी नुकसान पहुंचाया है। यह गैस फील्ड कतर तक फैला हुआ है और दुनिया के सबसे बड़े गैस भंडारों में से एक माना जाता है। जवाब में ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए कुवैत की मीना अल-अहमदी रिफाइनरी पर ड्रोन हमले किए हैं, जिससे वहां की कई इकाइयों में आग लग गई। ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि उसके गैस फील्ड्स पर हुए हमले का जवाब अभी ‘अधूरा’ है।
युद्ध में अत्याधुनिक हथियारों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स‘ (IRGC) ने दावा किया है कि वह लगातार बैलिस्टिक मिसाइलों का निर्माण कर रहा है और उसके पास हमलों के लिए पर्याप्त क्षमता मौजूद है। पिछले 24 घंटों में ईरान ने इजरायल की ओर कई मिसाइलें दागीं, जिनमें से कुछ को इजरायल के डिफेंस सिस्टम ने इंटरसेप्ट किया है।
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इस संघर्ष ने वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति श्रृंखला को लाइफ सपोर्ट पर ला खड़ा किया है। खाड़ी देशों के तेल ठिकानों पर लगातार हो रहे हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में हड़कंप मचा हुआ है। हालात इतने गंभीर हैं कि कतर पर हुए ईरानी हमले के कारण टेक इंडस्ट्री के लिए जरूरी हीलियम गैस की कमी हो गई है। यदि यह जंग जल्द नहीं थमी तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें और मुद्रास्फीति पूरी दुनिया के लिए नई मुसीबत बन सकती हैं। फिलहाल, कूटनीतिक रास्तों से युद्धविराम की कोई भी संभावना नजर नहीं आ रही है।