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Israel Iran War Haifa Oil Refinery Attack: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। शुक्रवार को ईरान ने इजरायल के रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण शहर हाइफा पर भीषण मिसाइल हमला किया। यह हमला न केवल नागरिक इलाकों पर था बल्कि इसका मुख्य निशाना इजरायल का वह ‘ऑयल हब’ था जिसे देश की आर्थिक रीढ़ माना जाता है। इस हमले ने इजरायल के साथ-साथ पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के खतरे को और अधिक गहरा कर दिया है।
हाइफा शहर इजरायल के लिए रणनीतिक रूप से कितना महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां देश की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी स्थित है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इजरायल में इस्तेमाल होने वाले कुल तेल का लगभग 70% हिस्सा इसी केंद्र से रिफाइन होकर निकलता है।
ईरानी मिसाइलों के गिरने से यहां कम से कम छह लोग घायल हुए हैं और कई आवासीय इमारतों को भी भारी नुकसान पहुxचा है। इजरायली मेडिकल सूत्रों और स्थानीय मीडिया के मुताबिक, एक बुजुर्ग व्यक्ति मलबे की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हुआ है।
ईरान की जवाबी कार्रवाई का दायरा केवल इजरायल तक सीमित नहीं रहा। शुक्रवार सुबह कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के ऊर्जा और नागरिक बुनियादी ढांचों पर भी बड़े हमले किए गए। कुवैत सरकार ने पुष्टि की है कि एक ईरानी ड्रोन हमले में उनके महत्वपूर्ण ‘डीसैलिनेशन’ प्लांट को नुकसान पहुंचा है।
यह कुवैत के लिए एक अस्तित्वगत संकट है क्योंकि वहां 90% पीने का पानी समुद्र के खारे पानी को मीठा बनाने वाले इन्हीं संयंत्रों से आता है। वहीं, यूएई की ‘हबशन गैस फैसिलिटी’ में एक इंटरसेप्ट किए गए मलबे के कारण आग लग गई जिसके बाद वहां का परिचालन फिलहाल रोक दिया गया है।
इस तनाव के बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उसने यूएई में अमेरिकी एविएशन कर्मियों की एक ‘सीक्रेट मीटिंग’ को बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाया है। ईरान के मुताबिक, इस बैठक में अमेरिकी इंजीनियर और सैन्य पायलट मौजूद थे। हालांकि, इस हमले की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल के तेल केंद्रों और खाड़ी के पानी के स्रोतों पर हो रहे ये हमले ‘विश्व युद्ध’ जैसी स्थिति पैदा कर रहे हैं। सऊदी अरब ने भी दावा किया है कि उसकी सेना ने शुक्रवार को 14 ईरानी ड्रोनों को मार गिराया है। जिस तरह से ऊर्जा और नागरिक सुविधाओं को युद्ध का मैदान बनाया जा रहा है उससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कमी और खाद्य पदार्थों की कीमतों में भारी उछाल की आशंका प्रबल हो गई है।