तेहरान की IUST यूनिवर्सिटी पर इजरायली हमला (सोर्स-सोशल मीडिया)
Middle East War University Strike: मिडिल-ईस्ट की जंग अब किताबों और क्लासरूम तक पहुंच गई है जहां तेहरान की प्रमुख यूनिवर्सिटी IUST पर इजरायली हमला हुआ है। 28 मार्च 2026 को हुई इस एयर स्ट्राइक में यूनिवर्सिटी की इंजीनियरिंग और फिजिक्स लैब पूरी तरह से मलबे के ढेर में तब्दील हो गई हैं। इस हमले के बाद ईरान ने अमेरिका को अल्टीमेटम दिया है और भविष्य में भीषण जवाबी कार्रवाई करने की खुली चेतावनी दी है। मध्य-पूर्व युद्ध विश्वविद्यालय हड़ताल के इस घटनाक्रम ने पूरे विश्व में तनाव की स्थिति पैदा कर दी है और शिक्षा के केंद्रों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं।
तेहरान की इस प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी पर हुए हमले ने न केवल इमारतों को भारी नुकसान पहुंचाया है बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। जिसे कभी इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता था, आज वहां केवल धुआं और बर्बाद प्रयोगशालाएं ही शेष दिखाई दे रही हैं। इजरायल का दावा है कि इन लैब्स का उपयोग डिफेंस और न्यूक्लियर रिसर्च के लिए गुप्त रूप से किया जा रहा था।
ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी यानी IUST की स्थापना वर्ष 1929 में हुई थी और यह ईरान का पहला आधुनिक तकनीकी संस्थान माना जाता है। इसकी 97 साल की लंबी इंजीनियरिंग विरासत है जिसने देश को कई बड़े वैज्ञानिक, इंजीनियर और महत्वपूर्ण टेक्नोक्रेट्स दिए हैं। आज यहां लगभग 15,000 से 19,000 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं जिनकी पढ़ाई अब इस हमले के कारण पूरी तरह से बाधित हो गई है।
यह यूनिवर्सिटी केवल ईरान ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अपनी बेहतरीन इंजीनियरिंग शिक्षा के लिए जानी जाती है और इसका शैक्षणिक रिकॉर्ड काफी शानदार रहा है। QS वर्ल्ड रैंकिंग के अनुसार इस संस्थान के सिविल, मैकेनिकल और मैटेरियल साइंस विभाग दुनिया के शीर्ष 100 विभागों में अपनी जगह रखते हैं। इजरायल के हमले ने इसी वैश्विक ज्ञान के केंद्र को निशाना बनाया है जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा जगत में काफी आक्रोश देखा जा रहा है।
IUST में दाखिला लेना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है क्योंकि इसके लिए छात्रों को बेहद कठिन ‘कोनकूर’ नेशनल एंट्रेंस एग्जाम पास करना पड़ता है। हर साल लाखों छात्र इस परीक्षा में बैठते हैं लेकिन केवल टॉप 1% मेधावी छात्रों को ही मुख्य कैंपस में पढ़ने का अवसर प्राप्त होता है। यहां की एक-एक सीट के लिए हजारों छात्रों के बीच कड़ा मुकाबला होता है जो इस संस्थान की वैश्विक गरिमा और महत्ता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
इजरायली सेना ने इस हमले को जायज ठहराते हुए कहा है कि यह केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं था बल्कि यहां संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा था। उनके अनुसार यूनिवर्सिटी की लैब्स का इस्तेमाल परमाणु अनुसंधान और रक्षा उपकरणों को विकसित करने के लिए किया जा रहा था, जिससे वे सुरक्षा के लिए खतरा थे। हालांकि ईरान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है और इसे ज्ञान के मंदिर पर एक सोची-समझी कायराना हमला बताया है।
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हमले के तुरंत बाद ईरान के रक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है और अमेरिका को इस घटना के लिए जिम्मेदार मानते हुए सख्त अल्टीमेटम जारी किया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी शिक्षा संस्थाओं पर इस तरह के अपमान को बर्दाश्त नहीं करेगा और इसका बदला जरूर लिया जाएगा। फिलहाल तेहरान के कई इलाकों में तनाव व्याप्त है और पूरी यूनिवर्सिटी के मुख्य परिसरों में सुरक्षाबलों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।