

Donald Trump Hindi News: दुनिया नए तानाशाही के दौर की गवाह बनने वाली है। मौजूदा दौर में अमेरिका किसी भी देश पर हमला कर सकता है। वहां के राष्ट्राध्यक्ष को अगवा कर सकता है। आसपास के देशों को धमका रहा है। वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो के खिलाफ सफल ऑपरेशन ने ट्रंप को मनबढ़ बनाया है। यही वजह है कि वह कई देशों को खुली धमकी दे रह हैं। ट्रंप, उनके सहयोगी और मीडिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि मौजूदा समय में 6 देश अमेरिका के रडार पर हैं। पूरी संभावना है कि ट्रंप प्रशासन इन देशों के खिलाफ बड़ा कदम उठा सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने मैक्सिको, क्यूबा और कोलंबिया की सरकारों के खिलाफ एक्शन की धमकी दी है। ट्रंप का आरोप है कि ये देश अमेरिका में ड्रग्स की तस्करी करते हैं। यहां रूस और चीन का दखल है। इस कारण पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिकी हित खतरे में है। यूरोप में अमेरिका की निगाह ग्रीनलैंड पर टिकी हुई है। ट्रंप प्रशासन कई बार कब्जे की बात खुलकर कह चुका है। दूसरी ओर इस मनमानी पर यूरोपीय नेताओं ने भी चुप्पी साध रखी है।
डोनाल्ड ट्रंप ईरान को हमले की धमकी दे रहे हैं। पिछले साल जून में अमेरिकी सेना ईरान के 3 परमाणु संयंत्रों पर हमला की थी। आरोप था कि ईरान परमाणु बम बना रहाहै। इस बार बहाना अलग है। ट्रंप ईरान के प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा है कि ईरान ने प्रदर्शनकारियों पर को मारा तो अमेरिका दखल देगा। दरअसल, अमेरिका और इजरायल कई दशकों से ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को हटाना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें रूस का सहयोग है।
अमेरिका के फ्लोरिडा तट से कुछ दूरी में छोटा-सा देश क्यूबा है। यह वामपंथ का बड़ा गढ़ है। कई दशकों से अमेरिका और क्यूबा में तनातनी है। रूस से करीबी होने के कारण क्यूबा अमेरिका के निशाने पर है। अमेरिका क्यूबा पर भी धावा बोल सकता है। जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से पूछा गया कि क्या क्यूबा अगला निशाना है? उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि वह बड़ी मुसीबत में है। एक दिन पहले रूबियो ने कहा था कि मैं हवाना में होता और सरकार का हिस्सा होता तो थोड़ा चिंतित होता। ट्रंप खुद कह चुके हैं कि क्यूबा पतन के कगार पर है।
वेनेजुएला के सबसे करीब होने से कोलंबिया सबसे अधिक टेंशन में है। वजह है कि डोनाल्ड ट्रंप कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो को धमकी दे चुके हैं। उन पर कोकीन तस्करी में शामिल होने का आरोप मढ़ा है। हाल में ट्रंप ने कहा कि अब कोलिंबिया के राष्ट्रपति को हटाने का अभियान है। उन्होंने धमकी दी कि वामपंथी नेता को अपनी जान का ख्याल रखना होगा। जवाब में पेट्रो ने कहा कि मैं आपका इंतजार कर रहा हूं। आओ और मुझे पकड़ो।
ट्रंप मैक्सिको पर भी वेनेजुएला और कोलंबिया पर लगाया गया आरोप लगा रहे हैं। ट्रंप ने कहा है कि ड्रग कार्टेल को नियंत्रित करने के लिए मैक्सिको को कुछ जरूर करना होगा। आशंका जताई जा रही कि ट्रंप प्रशासन ड्रग कार्टेल के बहाने मैक्सिको पर हमला कर सकता है।
पिछले साल से ट्रंप की निगाह ग्रीनलैंड पर टिकी है। खास बात है कि ग्रीनलैंड नाटो सदस्य डेनमार्क का स्वायत्त इलाका है। अब अमेरिका की उसी पर नीयत खराब है। ट्रंप का तर्क है कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा की खातिर ग्रीनलैंड पर कब्जा जरूरी है। वहीं, विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप की निगाह यहां पर मौजूद रेयर अर्थ मिनरल्स पर है।
निकोलस मादुरो के अपहरण के बाद भी वेनेजुएला में अमेरिका की राह आसान नहीं है। वहां की सेना और राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने अमेरिकी आक्रामकता का जवाब देने को कहा। अमेरिका ने नई धमकी में कहा कि डेल्सी बात नहीं मानती हैं तो अमेरिका वेनेजुएला पर हमले करेंगे।
लंबे समय से अमेरिका की नजरें वेनेजुएला के तेल और खनिज पदार्थों पर टिकी हैं। ग्रीनलैंड में रेयर अर्थ मिनरल्स काफी मात्रा में है। ऐसे में अमेरिका चाहता है कि इस क्षेत्र में उसका दबदबा रहे। ताकि रेयर अर्थ मिनरल्स की रेस में वह चीन से आगे निकल जाए। ईरान में हमले की खास वजह है कि रूस के एक और सहयोगी को खत्म कर देना। इससे मध्य पूर्व में अमेरिकी स्थिति मजबूत होगी। वहां अमेरिकी हितों वाली सरकार आती है तो ईरान के तेल पर भी अमेरिका का कब्जा होगा।
कोलंबिया पर हमले के पीछे ड्रग्स कार्टेल कारण बताया जा रहा है। मगर, इससे उलट मामला दिख रहा। दरअसल, जब अमेरिका अप्रवासी लोगों को निकाल रहा था, तब उसने कोलिंबिया के लोगों को भी बाहर किया था। प्रवासियों को हथकड़ी बांधे जाने पर कोलंबिया ने आपत्ति दर्ज कराई थी। उसने अमेरिका के दो जहाजों को अपने यहां उतारने नहीं दिया था। इस कारण ट्रंप कोलंबिया के राष्ट्रपति को हटाना चाह रहे हैं। क्यूबा रूस का सहयोगी होने के साथ-साथ वामपंथ का गढ़ है। इसकी लोकेशन अमेरिकी तट के करीब है। अमेरिका सुरक्षा कारणों से क्यूबा को बड़ा खतरा मानता है। दरअसल, रूस ने एक बार यहां मिसाइलें तैनात कर दी थीं, जो दुनिया में क्यूबा मिसाइल संकट के तौर पर चर्चित है। अब अमेरिका नहीं चाहता है कि दोबारा उसे इस स्थिति का सामना करना पड़ जाए।