हसन रूहानी और रूहानी ज़रीफ़, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Iran War Hassan Rouhani Spying Allegations: ईरान में चल रहे युद्ध के बीच अब आंतरिक राजनीति में भी एक बड़ा विस्फोट हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ईरान के दो सबसे प्रमुख नेताओ पूर्व राष्ट्रपति हसन रूहानी और पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ पर देश के साथ ‘गद्दारी’ और अमेरिका के लिए ‘जासूसी’ करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
ईरानी शासन के कई प्रभावशाली नेताओं ने इन दोनों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है जिससे देश के भीतर सत्ता और नीति को लेकर गहरे मतभेद उजागर हो गए हैं।
इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ द्वारा दिया गया एक विस्तृत प्रस्ताव है। ज़रीफ़ ने सुझाव दिया था कि ईरान को अपनी मौजूदा रणनीतिक बढ़त का उपयोग करते हुए लड़ाई जारी रखने के बजाय जीत की घोषणा कर देनी चाहिए और फिर एक सम्मानजनक समझौते की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है तो इससे न केवल आम नागरिकों की जान जाएगी बल्कि देश के बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान होगा।
آتش زدن عکس ظریف توسط مردم تهران با شعار "مرگ بر سازشگر" pic.twitter.com/cSk9oyYpgN — راه دیالمه (@Rahe_dialameh) April 3, 2026
ज़रीफ़ के इस प्रस्ताव में परमाणु कार्यक्रम पर कुछ सीमाएं लगाने और Strait of Hormuz को फिर से खोलने के बदले सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाने की पेशकश की गई थी। उन्होंने अमेरिका के साथ संबंधों को सुधारने के लिए एक ‘नॉन-एग्रेसन पैक्ट’ और शांति समझौते का भी सुझाव दिया था। हालांकि, कट्टरपंथी गुटों ने उनके इस शांति संदेश को आत्मसमर्पण करार दिया और उन्हें ‘अमेरिका का एजेंट’ बताना शुरू कर दिया है।
तेहरान की सड़कों पर इन नेताओं के खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन देखे गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने जवाद ज़रीफ़ और हसन रूहानी की तस्वीरें जलाईं और उनके खिलाफ ‘मौत बर साजशगर’ के नारेबाजी की। ईरानी संसद के सदस्य हामिद रसाई ने अदालत से मांग की है कि इन दोनों नेताओं को राष्ट्र विरोधी गतिविधियों और दुश्मनों को फायदा पहुंचाने के आरोप में तुरंत जेल भेजा जाए।
स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई है कि धार्मिक गायक सईद हद्दादियान ने ज़रीफ़ को तीन दिनों के भीतर अपना बयान वापस न लेने पर उनके घर में घुसने तक की धमकी दे दी है।
पूर्व राष्ट्रपति हसन रूहानी 8 वर्षों तक देश का नेतृत्व किया, उन्होंने भी ज़रीफ़ के सुर में सुर मिलाते हुए कहा है कि देश को सम्मानजनक तरीके से युद्ध समाप्त करने की तैयारी करनी चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय हित और जनता की सुरक्षा के लिए नीतियों में तत्काल बदलाव की वकालत की है।
दूसरी ओर, मौजूदा राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी इस समय आलोचनाओं के घेरे में हैं। पेजेशकियान ने हाल ही में संकेत दिया था कि यदि जरूरी शर्तें पूरी होती हैं तो ईरान युद्ध समाप्त करने को तैयार है जिस पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कड़ी आपत्ति जताई है।
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तमाम आरोपों के बीच रूहानी के पूर्व सलाहकार हेसामुद्दीन आशना ने ज़रीफ़ का बचाव किया है। उनका तर्क है कि ज़रीफ़ के प्रस्ताव को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लेख पश्चिमी देशों को चेतावनी देने और बदलते वैश्विक परिदृश्य को समझाने के लिए था न कि घुटने टेकने का संकेत। हालांकि, फिलहाल ईरान के भीतर राष्ट्रवाद की लहर और कट्टरपंथी दबाव के बीच इन नेताओं की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।