

Masoud Pezeshkian Pens Open Letter to American People: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिकी जनता के नाम एक खुली चिट्ठी लिखकर जारी युद्ध को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस पत्र में उन्होंने ईरान को किसी भी देश के लिए खतरा मानने से इनकार किया और डोनाल्ड ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति को कठघरे में खड़ा किया।
बुधवार को जारी इस संदेश में पेजेश्कियन ने अमेरिकी नागरिकों से अपील की कि वे “भ्रामक और बनावटी कथाओं” से आगे बढ़कर यह सोचें कि ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई से आखिर किसके हित पूरे हो रहे हैं। यह चिट्ठी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने इसे ट्रंप के अमेरिका जनता को संबोधित करने से ठीक पहले लिखा।
ईरानी राष्ट्रपति ने अपने पत्र में सीधा सवाल उठाया कि इस युद्ध से अमेरिकी जनता को वास्तविक रूप से क्या लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों की मौत, चिकित्सा ढांचे को नुकसान और किसी देश को “पाषाण युग में भेजने” जैसी बयानबाजी अमेरिका की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचा रही है।
मसूद पेजेशकियान ने कहा कि ईरान किसी भी देश के लिए खतरा नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब ईरान परमाणु वार्ताओं में शामिल था, तब भी उस पर हमले किए गए। उन्होंने पिछले हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान के ऊर्जा और औद्योगिक ढांचे को निशाना बनाया गया, जिससे आम जनता प्रभावित हुई। उन्होंने इन हमलों को न केवल “युद्ध अपराध” बताया, बल्कि यह भी कहा कि इससे क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ती है, आर्थिक और मानवीय नुकसान होता है और लंबे समय तक तनाव बना रहता है।
यह चिट्ठी डोनाल्ड ट्रंप की हालिया धमकी के कुछ घंटों बाद सामने आई, जिसमें उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी।
ईरानी राष्ट्रपति ने यह भी सवाल उठाया कि क्या अमेरिका इस संघर्ष में बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले इजरायल के प्रभाव में आकर शामिल हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका इस टकराव में इजरायल के “प्रॉक्सी” के रूप में काम कर रहा है। पेजेश्कियन ने यह भी कहा कि इजरायल ईरान को खतरा बताकर अन्य मुद्दों से वैश्विक ध्यान हटाना चाहता है और इस संघर्ष को लंबा खींचने की कोशिश कर रहा है।
अपने पत्र में मसूद पेजेशकियान ने यह संकेत भी दिए कि ईरान युद्ध समाप्त करने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें जरूरी हैं। उन्होंने कूटनीति और संवाद को ही स्थायी समाधान का रास्ता बताया। यह चिट्ठी ऐसे समय में आई है जब मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है और वैश्विक स्तर पर इसके राजनीतिक व आर्थिक असर देखने को मिल रहे हैं।