सांकेतिक फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Iran War Chinese AI Tracking US Military: ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण युद्ध में अब चीन की एक नई और खतरनाक भूमिका सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, चीन की कई निजी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनियां ओपन-सोर्स डेटा का इस्तेमाल करके अमेरिकी सेना की हर गतिविधि को ट्रैक कर रही हैं और उन्हें सार्वजनिक कर रही हैं। इसे भविष्य के लिए एक बड़े सुरक्षा खतरे के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि ये कंपनियां उन जानकारियों को उजागर कर रही हैं जो आमतौर पर अत्यंत गोपनीय मानी जाती हैं।
ये चीनी कंपनियां सोशल मीडिया पर ऐसी बारीकी से जानकारी साझा कर रही हैं, जिसमें अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर तैनात हथियार, विमानों की स्थिति और समुद्र में चल रहे विशाल विमानवाहक पोतों (Aircraft Carriers) की सटीक मूवमेंट शामिल है। यह जानकारी सैटेलाइट तस्वीरों, फ्लाइट ट्रैकिंग और जहाजों के डेटा को AI के साथ जोड़कर तैयार की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक नए तरह का बाजार है जहां सार्वजनिक डेटा को खुफिया जानकारी में बदलकर बेचा जा रहा है।
हांगझोउ स्थित कंपनी MizarVision इस मामले में सबसे आगे है। इस कंपनी ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ से पहले मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना की तैनाती, USS गेराल्ड आर. फोर्ड और USS अब्राहम लिंकन जैसे कैरियर ग्रुप की मूवमेंट को ट्रैक करने का दावा किया है। इसने इजरायल, सऊदी अरब और कतर के एयरबेस पर मौजूद अमेरिकी विमानों की संख्या तक की जानकारी साझा की थी।
वहीं, Jingan Technology नामक एक अन्य कंपनी ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी B-2 स्टील्थ बॉम्बर्स के बीच की बातचीत को रिकॉर्ड किया है हालांकि अमेरिकी विशेषज्ञ इस दावे पर संदेह जता रहे हैं।
यद्यपि चीन की सरकार ने इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल होने से इनकार किया है, लेकिन इन कंपनियों को उस सरकारी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसमें निजी AI तकनीक को सैन्य इस्तेमाल के लिए बढ़ावा दिया जा रहा है।
वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने इस क्षेत्र में करोड़ों डॉलर का निवेश किया है और इसे और तेज करने के लिए एक नई पांच साल की योजना भी घोषित की है। अमेरिकी नेताओं ने चेतावनी दी है कि ऐसी कंपनियां चीन को यह सुविधा देती हैं कि वह सीधे युद्ध में शामिल हुए बिना अपने विरोधियों को नुकसान पहुंचा सके।
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युद्ध के इस मोर्चे पर केवल चीन ही सक्रिय नहीं है। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि रूस भी अमेरिकी ठिकानों पर हमले के लिए ईरान को खुफिया जानकारी मुहैया करा रहा है। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने स्वीकार किया है कि विरोधी देश ऐसी गतिविधियों में शामिल हैं और अमेरिका अब इनसे निपटने के लिए अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव कर रहा है।