खामेनेई की फौज ने किया कत्लेआम! कार्रवाई के नाम पर 12,000 लोगों को उतारा मौत के घाट, खुलासे से मचा हड़कंप
Iran Protests: ईरान इंटरनेशनल के मुताबिक 8-9 जनवरी के दमन में कम से कम 12,000 लोग मारे गए, जिसे सरकारी और सुरक्षा सूत्र ईरान के इतिहास का बड़ा नरसंहार बता रहे हैं।
- Written By: अक्षय साहू
ईरान में मरने वालों का आंकड़ा 12,000 पहुंचा (सोर्स- सोशल मीडिया)
Genocide in Iran: ईरान में पिछले दो हफ्तों से सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी है, जिसे रोकने के लिए सरकार दमनकारी नीति का सहारा ले रही। स्थानीय मीडिया आउटलेट ईरान इंटरनेशनल के अनुसार, इन प्रदर्शनों में अब तक 15 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। आउटलेट ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि 8 और 9 जनवरी की रात इंटरनेट बंद होने बाद हिसंक कार्रवाई की गई थी जिसमें हजारों लोग मारे गए थे।
ईरान इंटरनेशनल ने विभिन्न सरकारी और सुरक्षा सूत्रों की जानकारी के आधार पर बताया है कि हाल ही में हुए दमन में कम से कम 12,000 लोगों की हत्या हुई है, जो ईरान के समकालीन इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा नरसंहार है। मारे गए अधिकांश लोग 8 और 9 जनवरी की रातों में हुई हिंसा के दौरान घायल हुए थे, जब इंटरनेट और संचार सेवाओं को बड़े पैमाने पर बंद किया गया था।
सुनियोजित तरीके से की गई हत्या
इस संख्या की पुष्टि ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और राष्ट्रपति कार्यालय से प्राप्त विश्वसनीय सूचनाओं के आधार पर की गई है। ईरान इंटरनेशनल ने विभिन्न स्रोतों की रिपोर्ट का अध्ययन किया, जिसमें राष्ट्रपति कार्यालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सूत्र, मशहद, करमानशाह और इस्फहान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के सूत्र, प्रत्यक्षदर्शियों और मृतकों के परिवारों के बयान, चिकित्सा केंद्रों के आंकड़े, डॉक्टरों और नर्सों की रिपोर्ट शामिल हैं।
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सूत्रों के अनुसार, यह हत्या पूरी तरह से सुनियोजित थी और इसे सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के आदेश और सरकार की तीनों शाखाओं की स्वीकृति के तहत अंजाम दिया गया। सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद द्वारा गोलीबारी के आदेश के बाद इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया। मारे गए लोगों में बड़ी संख्या युवा और 30 वर्ष से कम उम्र के थे।
दमन को छिपाने की कोशिश जारी
ईरान में इस दमन को छिपाने के लिए व्यापक स्तर पर इंटरनेट और संचार अवरोध, मीडिया पर प्रतिबंध और पत्रकारों तथा गवाहों को धमकाना शामिल था। बताया जा रहा है कि देश के भीतर अधिकांश समाचार पत्र बंद हैं, और केवल कुछ वेबसाइटें आईआरआईबी के नियंत्रण में सक्रिय हैं। इस कदम को “संकट प्रबंधन” नहीं बल्कि सच्चाई को छुपाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
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इस घटना ने ईरान में अभूतपूर्व स्तर का भय और दमन पैदा कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी हाल के दिनों में जारी हिंसा और दमन की बढ़ती रिपोर्टों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। सुरक्षा और सूचना तक पहुँच पर नियंत्रण, इंटरनेट बंद और मीडिया सेंसरशिप जैसी कार्रवाइयाँ इस बड़े पैमाने पर हुई हिंसा की गंभीरता को दर्शाती हैं।
