ईरान के निर्वासित प्रिंस पहलवी से मिले ट्रंप...मीटिंग में हुई सीक्रेट डील, अब क्या करने जा रहा अमेरिका?

Iran Protests: ट्रंप प्रशासन ईरान विरोधी सैन्य और राजनीतिक विकल्पों पर विचार कर रहा है, प्रदर्शनकारियों को मदद देने का संकेत, जबकि ईरान ने अमेरिका पर तीखा पलटवार किया।
Trump Reza Pahlavi Meeting
रेजा पहलवी और ट्रंप प्रशासन के बीच हुई अहम बैठक (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Trump Reza Pahlavi Meeting: ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़े संकेत दिए हैं कि तेहरान के खिलाफ सैन्य या राजनीतिक कदम उठाए जा सकते हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ संभावित स्ट्राइक ऑप्शंस पर विचार कर रहा है। इस सिलसिले में मंगलवार को व्हाइट हाउस में राष्ट्रीय सुरक्षा टीम की बैठक हुई, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों ने विभिन्न विकल्पों पर मंथन किया।

राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अब ईरानी अधिकारियों के साथ कोई बातचीत नहीं होगी और सभी निर्धारित बैठकें रद्द कर दी गई हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिका प्रदर्शनकारियों को मदद पहुंचा सकता है। हालांकि, प्रशासन के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद हैं। कई राजनीतिक सलाहकारों ने चेतावनी दी है कि हाई रिस्क सैन्य ऑपरेशन ‘अमेरिका फर्स्ट’ विदेश नीति को प्रभावित कर सकता है।

रेजा पहलवी से सीक्रेट मीटिंग

Axios ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि, व्हाइट हाउस के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने ईरान के निर्वासित पूर्व क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी से गुप्त बैठक की। यह पहली हाई-लेवल बैठक मानी जा रही है, जो पिछले दो सप्ताह से जारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई। रेजा पहलवी खुद को संभावित ‘संक्रमणकालीन नेता’ के रूप में पेश कर रहे हैं, अगर वर्तमान ईरानी शासन गिरता है। रिपोर्ट में आगे कहा गया कि व्हाइट हाउस की बैठक में सैन्य कार्रवाई के अंतिम निर्णय पर कोई निष्कर्ष नहीं निकला है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सुझाव दिया कि प्रशासन गैर-सैन्य उपायों, जैसे कूटनीतिक दबाव, आर्थिक प्रतिबंध और राजनीतिक समर्थन, पर ध्यान दे।

ईरान ने ट्रंप-नेतन्याहू बताया जिम्मेदार

डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद, ईरान ने तीखा प्रतिक्रिया दी। सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी ने ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू को हिंसा भड़काने का दोषी ठहराया। संयुक्त राष्ट्र में ईरानी राजदूत ने भी अमेरिका और इजरायल पर राजनीतिक अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया।

अमेरिकी मानवाधिकार संगठन के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के विरोध में अब तक कम से कम 2,403 लोग मारे जा चुके हैं, जिसमें 12 बच्चे शामिल हैं। गिरफ्तार लोगों की संख्या 18,137 तक पहुंच चुकी है। प्रदर्शन अब सीधे धार्मिक शासन के खिलाफ चुनौती बन चुके हैं।

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