Ali Khamenei And Arafi (Designed Image)
Iran New Supreme Leader: ईरान इजरायल युद्ध के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद ईरान की सत्ता संरचना पूरी तरह हिल चुकी थी लेकिन ईरान ने अपने देश के संविधान के अनुच्छेद 111 को लागू कर दिया है। इस अनुच्छेद के चलते आपात स्थिति में सर्वोच्च नेता की शक्तियां अस्थायी रूप से तीन सदस्यीय नेतृत्व परिषद को सौंप दी जाती हैं, अनुच्छेद 111 के तहत अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को अस्थायी नेतृत्व परिषद का न्यायविद सदस्य बनाया गया है।
अराफी का जन्म 1959 में ईरान के यज्द प्रांत में हुआ था, अराफी को ईरान की राजनीति और धार्मिक मामलो में अहम माना जाता है। द वीक की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने प्रारंभिक धार्मिक शिक्षा अपने पिता से प्राप्त की और 11 साल की उम्र में क़ोम चले गए, जो शिया इस्लामी शिक्षा का प्रमुख केंद्र माना जाता है। वहीं से उन्होंने उच्च धार्मिक अध्ययन किया और धीरे-धीरे ईरान की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाई। अराफी को पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का करीबी माना जाता है।
अराफी अंग्रेज़ी और अरबी दोनों भाषाओं में निपुण माने जाते हैं, उन्होंने कई मौकों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से इस्लामी विचारधारा के प्रचार-प्रसार और सरकारी तंत्र के मॉडर्नाइजेशन की वकालत की है। यही वजह है कि उन्हें खामेनेई के बाद अंतरिम सुप्रीम लीडर बनाया गया है
अलीरेजा गार्जियन काउंसिल के सदस्य भी रहे हैं यह वही काउंसिल है जो संसद द्वारा पारित कानूनों की समीक्षा करती है और चुनावी उम्मीदवारों की वैधता तय करती है, इसके अलावा वे अल-मुस्तफा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के पूर्व चेयरमैन और असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के सदस्य भी रह चुके हैं, यह वही संस्था है जो सुप्रीम लीडर की नियुक्ति करती है।
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अमेरिका और इजरायल के जॉइंट ऑपरेशन एपिक फ्यूरी में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई शीर्ष कमांडर मारे गए हैं। इजरायल के अनुसार इस हमले में ईरान के लगभग 40 कमांडर मारे गए हैं जिनमें ईरान के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ अब्दोलरहिम मौसवी भी शामिल हैं।