
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
EU Sanctions IRGC: ईरान और इटली के बीच कूटनीतिक रिश्तों में इस समय गंभीर तनाव देखने को मिल रहा है और दोनों देशों के संबंध अब अपने निचले स्तर पर पहुंचते नजर आ रहे हैं। इसी कड़ी में ईरान के विदेश मंत्रालय ने इटली के राजदूत को तलब कर उनके समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
दरअसल, यह कदम इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी के हालिया बयान के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने यूरोपीय यूनियन (EU) से ईरान की सैन्य शाखा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आतंकी संगठन घोषित करने की मांग की थी। इटली के इस रुख को ईरान ने अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप और देश की संप्रभुता के खिलाफ बताया है।
इटली के विदेश मंत्री ताजानी ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे को ब्रुसेल्स में होने वाली EU विदेश मंत्रियों की बैठक में मजबूती से उठाएंगे। इटली का तर्क है कि ईरान में हाल के विरोध प्रदर्शनों के दौरान बड़ी संख्या में आम नागरिकों की जान गई है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मानवाधिकार संगठन HRANA के मुताबिक, इन प्रदर्शनों में अब तक लगभग 6,000 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि हजारों अन्य मौतों की जांच जारी है।
ईरान ने इटली की इस पहल को ‘गलत और खतरनाक’ करार दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के पश्चिमी यूरोप मामलों के महानिदेशक ने चेतावनी दी है कि यदि IRGC को आतंकी घोषित किया गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। तेहरान ने इटली से अपने रुख पर दोबारा विचार करने और उसे सुधारने की अपील की है।
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रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को आतंकवादी संगठन घोषित करना यूरोपीय संघ के लिए इतना आसान फैसला नहीं है, क्योंकि इसके लिए EU के सभी सदस्य देशों की सर्वसम्मति आवश्यक होती है। फिलहाल इस मुद्दे पर चर्चा जरूर चल रही है, लेकिन अब तक सभी देशों के बीच एक समान और स्पष्ट सहमति नहीं बन सकी है।
हालांकि, यूरोपीय संघ पहले ही ईरान पर कई तरह के प्रतिबंध लागू कर चुका है। इनमें ड्रोन और मिसाइल तकनीक से जुड़े प्रतिबंध शामिल हैं, ताकि सैन्य गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।






