डोनाल्ड ट्रंप और मोजतबा खामेनेई, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Iran Stronger Position US Iran Talks: पाकिस्तान की मेजबानी में चल रही अमेरिका और ईरान की ऐतिहासिक शांति वार्ता अब एक बेहद नाजुक और रोमांचक दौर में है। एक तरफ जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दावा कर रहे हैं कि ईरान की सैन्य शक्ति काफी हद तक निष्क्रिय हो चुकी है, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की राय इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है।
तेहरान विश्वविद्यालय में पश्चिम एशियाई अध्ययन की सहायक प्रोफेसर एलहम कदखुदाई ने इस वार्ता पर अपनी विशेषज्ञ टिप्पणी देते हुए कहा है कि ईरान वर्तमान में पहले से कहीं अधिक मजबूत स्थिति में है।
प्रोफेसर कदखुदाई के अनुसार, इस बार बातचीत की मेज पर ईरान की सबसे बड़ी ताकत ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज‘ (Strait of Hormuz) पर उसका नियंत्रण है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए जीवन रेखा माना जाता है। विशेषज्ञ का मानना है कि ईरान ने इस बार वार्ता का ढांचा खुद अपनी शर्तों पर और अपनी स्थिति को मजबूत बनाकर तैयार किया है।
उनके अनुसार, ‘ईरान इस समय थोड़ा ज्यादा मजबूत स्थिति में है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका रणनीतिक नियंत्रण बना हुआ है’। यही कारण है कि अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए ईरान को पूरी तरह नजरअंदाज करना नामुमकिन साबित हो रहा है।
अक्सर चर्चा होती है कि क्या अमेरिका ईरान पर सैन्य हमला कर सकता है? इस पर प्रोफेसर कदखुदाई ने दो टूक कहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य विकल्प अब व्यावहारिक (Practical) नहीं रह गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका कोई सैन्य दुस्साहस करता है, तो इसके वैश्विक परिणाम बेहद विनाशकारी होंगे।
यह हमला न केवल क्षेत्र में अस्थिरता लाएगा बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी सैन्य विकल्प की लागत इतनी अधिक है कि दुनिया का कोई भी देश, जिसमें स्वयं अमेरिका भी शामिल है, इसे वहन नहीं कर पाएगा।
लेबनान में जारी संघर्ष पर बात करते हुए ईरान ने अपना रुख साफ कर दिया है। प्रोफेसर कदखुदाई के मुताबिक, हिज्बुल्लाह का मुद्दा ईरान के लिए गैर-समझौता योग्य (Non-negotiable) है। उन्होंने तर्क दिया कि हिज्बुल्लाह लेबनान की लोकतांत्रिक सरकार का हिस्सा है और ईरान का एक महत्वपूर्ण सहयोगी भी। ईरान का स्पष्ट रुख है कि इजरायल को लेबनान के निर्दोष नागरिकों पर हमले तुरंत बंद करने चाहिए। वार्ता में शामिल प्रतिनिधियों का भी मानना है कि जब तक लेबनान सीमा पर शांति नहीं होगी, तब तक क्षेत्र में स्थायी सीजफायर संभव नहीं है।
इस्लामाबाद के एक प्रमुख होटल में कड़ी सुरक्षा के बीच चल रही इस बैठक को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए ‘बेहद अहम’ बताया है। प्रतिनिधिमंडलों में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के प्रतिनिधि शामिल हैं।
यह भी पढ़ें:- ट्रंप का मीडिया पर तीखा हमला, कहा-ईरान की सैन्य शक्ति पूरी तरह तबाह; अब दुनिया को अमेरिकी तेल का सहारा
हालांकि ईरान की जनता इन वार्ताओं के नतीजों को लेकर बहुत ज्यादा आशावादी नहीं है, लेकिन वे फिर भी इसे आगे बढ़ने के एक अवसर के रूप में देख रहे हैं। 8 अप्रैल से लागू हुए अस्थायी युद्धविराम को स्थायी शांति में बदलना ही इस पूरी कूटनीतिक कवायद का एकमात्र लक्ष्य है।