ट्रंप की एक जिद ने दुनिया को तेल-गैस संकट में झोंका, भारत ही नहीं अमेरिका-इजरायल में भी मची खलबली
Global Oil Gas Crisis: ईरान-इजरायल जंग और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों ने दुनिया भर में तेल और गैस का गंभीर संकट पैदा कर दिया है। जानिए इस फैसले से अमेरिका और इजरायल पर इसका क्या असर पड़ा है।
- Written By: अमन उपाध्याय
ईरान इजरायल युद्ध वैश्विक तेल संकट, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Iran Israel War Oil Crisis: ईरान और इजरायल के बीच गहराते सैन्य संघर्ष और इसमें अमेरिका की सीधी भागीदारी ने पूरी दुनिया को एक गंभीर ऊर्जा संकट (Energy Crisis) की दहलीज पर खड़ा कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया फैसलों और युद्ध को लेकर उनकी आक्रामक जिद ने वैश्विक तेल और गैस बाजार में भारी उथल-पुथल मचा दी है। आज स्थिति यह है कि न केवल भारत जैसे विकासशील देश, बल्कि खुद अमेरिका जैसा शक्तिशाली राष्ट्र भी तेल की आसमान छूती कीमतों और आपूर्ति की कमी से जूझने को मजबूर है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य और सप्लाई चैन पर प्रहार
इस युद्ध का सबसे घातक असर रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज‘ पर पड़ा है। ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी इस जंग की वजह से इस समुद्री मार्ग से होने वाली तेल की आपूर्ति बाधित हो गई है। इसके परिणामस्वरूप, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 100 प्रति बैरल डॉलर के पार पहुंच गई हैं।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में इस तरह का उछाल आखिरी बार मार्च 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के दौरान देखा गया था। आपूर्ति में आई इस कमी ने भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।
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सबसे बड़ा उत्पादक होने के बावजूद कीमतों में उछाल
अमेरिका वर्तमान में तेल, गैस और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का एक विशाल उत्पादक और निर्यातक देश है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका हर दिन औसतन 6 मिलियन बैरल से ज्यादा रिफाइंड उत्पाद और 4 मिलियन बैरल से अधिक कच्चा तेल निर्यात करता है। अमेरिका का तेल उत्पादन मुख्य रूप से 32 राज्यों से आता है, जिनमें टेक्सास, न्यू मैक्सिको, नॉर्थ डकोटा, अलास्का, ओक्लाहोमा और कोलोराडो सबसे बड़े उत्पादक हैं।
हालांकि अमेरिका का नेट ऑयल ट्रेड बैलेंस वर्तमान में हर दिन 2.8 मिलियन बैरल पॉजिटिव हैृ लेकिन युद्ध की वैश्विक आंच से वह खुद को नहीं बचा सका है। अमेरिका में रेगुलर गैसोलीन की औसत कीमत महज एक हफ्ते में 14% बढ़कर 3.41 प्रति डॉलर गैलन से ऊपर चली गई है, जबकि युद्ध से पहले यह 3 डॉलर से भी कम थी।
इजरायल की स्थिति और गैस निर्यात पर रोक
इजरायल खुद एक प्रमुख प्राकृतिक गैस उत्पादक देश है जो पाइपलाइन के माध्यम से मिस्र और जॉर्डन को गैस निर्यात करता है। हालांकि, ईरान के हमलों के बीच सुरक्षा को देखते हुए इजरायल ने अस्थायी रूप से अपने कुछ गैस फील्ड्स का परिचालन बंद कर दिया है जिससे उसके गैस निर्यात पर ब्रेक लग गया है। हालांकि इजरायल के भीतर अब तक किसी बड़े तेल संकट की खबरें सामने नहीं आई हैं लेकिन क्षेत्रीय अस्थिरता ने वहां के ऊर्जा क्षेत्र को चिंता में डाल दिया है।
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भारत पर प्रभाव और भविष्य की राह
भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। वैश्विक बाजार में कीमतों में होने वाली कोई भी वृद्धि सीधे तौर पर भारतीय उपभोक्ताओं की जेब और देश के राजकोषीय घाटे को प्रभावित करती है। यदि ईरान-इजरायल संघर्ष जल्द नहीं थमा, तो आने वाले समय में भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
