ईरान का सबसे बड़ा वार! समंदर के ऊपर मार गिराया अमेरिकी F-16 फाइटर जेट? पेंटागन में मची खलबली
Iran-US War News: ईरान की IRGC ने दावा किया है कि उसने एक अमेरिकी F-16 फाइटर जेट और MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया है। मिडिल ईस्ट में जारी इस 'इन्फॉर्मेशन वार' से तनाव चरम पर पहुंच गया है।
- Written By: अक्षय साहू
ईरान ने अमेरिकी F-16 फाइटर जेट को मार गिराने का दावा किया (सोर्स-सोशल मीडिया)
IRGC Down US F-16 Fighter Jet: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उनके फाइटर जेट F-16 को निशाना बनाने का बड़ा दावा किया है। ईरान के अर्धसैनिक बल इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के हवाले से लोकल मीडिया ने बताया कि उसने एक F-16 लड़ाकू विमान और एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को मार गिराया है। हालांकि, अमेरिका की तरफ से इस दावे की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
IRGC ने अपने बयान में कहा कि यह कार्रवाई ईरान के नागरिकों और औद्योगिक साइटों पर हुए हमलों के जवाब में की गई। IRGC ने यह भी दावा किया कि उसने ‘कब्जे वाले क्षेत्रों’ में स्थित अमेरिकी और इजरायली ठिकानों को निशाना बनाया।
अमेरिका के कई फाइटर जेट गिराने का दावा
IRGC ने शिराज (दक्षिण ईरान) के ऊपर उड़ रहे अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को गिराने और F-16 फाइटर जेट पर हमला करने का दावा किया। हालांकि, F-16 पर हुए हमले के नुकसान या स्थिति के बारे में कोई विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
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सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि बेहद जरूरी है, क्योंकि दोनों पक्षों की ओर से सूचना युद्ध (Information War) जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे दावे क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकते हैं और वैश्विक सुरक्षा पर भी असर डाल सकते हैं।
मिडिल ईस्ट में पहले से ही तनावपूर्ण माहौल है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच लगातार हमले और जवाबी कार्रवाइयां हो रही हैं। इस संघर्ष के और व्यापक होने के संकेत हैं। IRGC के इस दावे के बाद, खाड़ी क्षेत्र और आसपास के देशों में सुरक्षा सतर्कता बढ़ा दी गई है।
मिडिल ईस्ट की परिस्थिति नाजुक
विशेषज्ञों और वैश्विक संगठनों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि यह संघर्ष कब और किस मोड़ पर समाप्त होगा। अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव न केवल क्षेत्रीय स्थिरता बल्कि वैश्विक ऊर्जा और सुरक्षा परिस्थितियों पर भी प्रभाव डाल सकता है।
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फिलहाल, मिडिल ईस्ट की परिस्थितियां नाजुक बनी हुई हैं और किसी भी समय हालात बदल सकते हैं। दुनिया भर के सैन्य और कूटनीतिक विशेषज्ञ इस पर लगातार नजर बनाए हुए हैं कि ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी यह तनाव किसी बड़े संघर्ष में बदलता है या कूटनीतिक प्रयासों से नियंत्रित रहता है।
