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ईरान पर अमेरिकी हमले की आहट: रूस, चीन और जी-7 देशों का रुख, जानें कौन किसके साथ?
US Iran Tension: ईरान पर अमेरिकी हमले की आशंका के बीच रूस-चीन ने हस्तक्षेप की निंदा की है, जबकि जी-7 ने कड़े प्रतिबंधों की चेतावनी दी है। खाड़ी देशों को तेल संकट और क्षेत्रीय अस्थिरता का डर सता रहा है।
- Written By: प्रिया सिंह

ईरान अमेरिकी संकट (सोर्स-AI डिज़ाइन)
US military action against Iran: ईरान में गहराते आंतरिक विद्रोह और मानवाधिकारों के दमन के बीच अमेरिका द्वारा सैन्य कार्रवाई की संभावना ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सीधी चेतावनियों और प्रदर्शनकारियों को मदद के वादों ने तेहरान के साथ दशकों पुराने संघर्ष को एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा कर दिया है। जहां एक ओर पश्चिमी देश ईरान में सत्ता परिवर्तन की वकालत कर रहे हैं, वहीं रूस और चीन जैसे देश बाहरी हस्तक्षेप को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बता रहे हैं। खाड़ी देशों में भी स्थिरता और तेल आपूर्ति बाधित होने का भय व्याप्त है, जिससे मध्य पूर्व का भविष्य अनिश्चित नजर आ रहा है।
रूस और चीन का कड़ा रुख
रूस और चीन ने ईरान के आंतरिक मामलों में अमेरिकी हस्तक्षेप की स्पष्ट शब्दों में निंदा की है और इसे ‘कलर रिवॉल्यूशन’ की साजिश बताया है। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़ाखारोवा ने चेतावनी दी है कि ईरान पर कोई भी हमला मध्य पूर्व में अत्यंत गंभीर अंतरराष्ट्रीय परिणाम पैदा करेगा। हालांकि, यह स्पष्ट है कि दोनों देश केवल जुबानी विरोध तक सीमित हैं और अमेरिका के साथ सीधे सैन्य टकराव का खतरा नहीं उठाना चाहते।
जी-7 देशों की चेतावनी
जी-7 देशों ने ईरान सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की जा रही “क्रूर दमनात्मक कार्रवाई” का पुरजोर विरोध किया है। कनाडा, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे सदस्य देशों ने स्पष्ट किया है कि अगर मानवाधिकारों का उल्लंघन जारी रहा, तो ईरान पर और भी कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे। इन देशों का मानना है कि दिसंबर 2025 से जारी ये प्रदर्शन ईरानी जनता की स्वतंत्रता और गरिमा की वैध आकांक्षाओं का प्रतिबिंब हैं।
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क्षेत्रीय शक्तियों की दुविधा
तुर्की और सऊदी अरब जैसे पड़ोसी देश ईरान में अराजकता फैलने की संभावना से चिंतित हैं, क्योंकि इसका असर उनकी अपनी सीमाओं पर पड़ सकता है। तुर्की ने विशेष रूप से इजरायल की आलोचना करते हुए कहा है कि वह अपने हितों के लिए ईरान के आंतरिक संकट का लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है। सऊदी अरब ने कथित तौर पर अमेरिका को अपने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया है ताकि वह संघर्ष से दूर रह सके।
तेल संकट का खतरा
‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के अनुसार, अरब देशों को सबसे बड़ा डर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने का है, जहां से दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल गुजरता है। अगर ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इस रास्ते को बाधित किया, तो वैश्विक तेल बाजारों में भारी उथल-पुथल मच जाएगी, जिसका सीधा असर अमेरिकी और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। कतर और ओमान जैसे देश पर्दे के पीछे से तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखे हुए हैं।
यह भी पढ़ें: ईरान में सरकार बदली…तो मालामाल हो जाएंगे पाक-चीन, भारत को क्या मिलेगा? जाने इनसाइड स्टोरी
ट्रंप की रणनीतिक योजना
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक सैन्य कार्रवाई पर अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन उन्होंने अपने सलाहकारों के साथ सभी विकल्पों को खुला रखा है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर ईरानी लोगों से अपना विरोध जारी रखने की अपील करते हुए संकेत दिया है कि उन तक मदद पहुंचने की संभावना ज्यादा है। यह स्थिति जून 2025 में हुए पिछले टकरावों की तुलना में कहीं अधिक गंभीर नजर आ रही है, जिससे पूर्ण युद्ध का खतरा बढ़ गया है।
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