ईरान में किसी भी वक्त छिड़ सकता है गृहयुद्ध…92 प्रतिशत लोग खामेनेई से नाराज, खुलासे से हड़कंप
Iran News: ईरान में जनता का गुस्सा बढ़ा है। राष्ट्रपति सर्वेक्षण में 92% नागरिक असंतुष्ट पाए गए। प्रतिबंधों से अर्थव्यवस्था चरमराई है, रियाल कमजोर हुआ है और गरीबी-महंगाई ने हालात बिगाड़ दिए हैं।
- Written By: अक्षय साहू
अली खामेनेई (सोर्स- सोशल मीडिया)
Outrage Against Khamenei in Iran: ईरान में सरकार और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ जनता का गुस्सा अपने चरम पर है। हाल ही में राष्ट्रपति कार्यालय के सर्वेक्षण से पता चला है कि देश की मौजूदा स्थिति से करीब 92 प्रतिशत नागरिक असंतुष्ट हैं। यह आंकड़ा अब तक का सबसे बड़ा संकेत है कि सरकार और जनता के बीच भरोसे की दीवार तेजी से दरक रही है।
यह सर्वेक्षण राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियन के 16 प्रांतों के दौरे के दौरान कराया गया था, जिसका मकसद था जनता की राय जानना और स्थानीय प्रशासन के प्रदर्शन का आकलन करना। परिणामों में सामने आया कि 59 प्रतिशत प्रतिभागियों ने सांसदों के कार्यों को निराशाजनक बताया, जबकि अधिकांश प्रांतीय अधिकारियों को भी औसत या कमजोर रेटिंग मिली।
प्रतिबंधों के चलते गंभीर संकट में देश
ईरान की अर्थव्यवस्था पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते गंभीर संकट में है। तेल निर्यात में तेज गिरावट और रियाल की मूल्यह्रास ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। बीते कुछ महीनों में ईरानी रियाल ने अपनी लगभग 59 प्रतिशत कीमत खो दी है, जबकि आधिकारिक महंगाई दर 40 प्रतिशत से ऊपर पहुंच चुकी है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार ने जल्द ही ठोस आर्थिक सुधार और व्यावहारिक कदम नहीं उठाए, तो सामाजिक असंतोष और राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है।
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इसने स्थिति को और कठिन बना दिया हाल ही में इजराजल के साथ चले 12 दिन के युद्ध ने, जिसने ईरान को भारी नुकसान पहुंचाया। यह छोटा लेकिन महंगा संघर्ष न केवल देश की अर्थव्यवस्था पर बोझ बना, बल्कि अमेरिका के साथ जारी वार्ताओं को भी धुंधला कर गया। अब ईरान को एक साथ घरेलू संकटों, अंतरराष्ट्रीय दबावों और प्रतिबंधों से निपटना पड़ रहा है।
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बेरोजगारी-गरीबी बड़ी समस्याएं
बीते एक साल में गरीबी रेखा पर बड़ा असर देखा गया है यह करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ी है। अनुमान है कि अब देश की लगभग 40 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रही है। बेरोजगारी दर भी 12 प्रतिशत से ऊपर है, विशेषकर सीमावर्ती इलाकों में हालात और खराब हैं। कई स्वतंत्र स्रोतों के अनुसार, वास्तविक महंगाई दर सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक, 40 प्रतिशत से ऊपर है, जिससे आम जनता की आर्थिक मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं।
