इजराइल का तेहरान पर हमला: 80 फाइटर जेट्स ने परमाणु ठिकानों को बनाया निशाना, ट्रंप की बिना शर्त सरेंडर की मांग
Tehran Bombing: इजराइली वायुसेना ने 80 से ज्यादा लड़ाकू विमानों के साथ तेहरान पर भीषण बमबारी की है। परमाणु और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के बीच ट्रंप ने ईरान से बिना शर्त सरेंडर की मांग की है।
- Written By: प्रिया सिंह
इजराइल ने 80 फाइटर जेट्स से इरान के परमाणु ठिकानों को बनाया निशाना (सोर्स-सोशल मीडिया)
Israeli Warplanes Strike Tehran: पश्चिम एशिया में जारी जंग अब अपने सबसे भीषण और खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है। शुक्रवार तड़के इजराइली लड़ाकू विमानों ने ईरान की राजधानी तेहरान पर जोरदार हमला बोला है। इजराइल ने अपनी कार्रवाई में सैन्य ठिकानों के साथ-साथ परमाणु साइट्स को भी निशाना बनाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग कर तनाव को और बढ़ा दिया है।
80 लड़ाकू विमानों का हमला
इजराइली वायुसेना के 80 से ज्यादा लड़ाकू विमानों ने शुक्रवार तड़के तेहरान के आसमान को दहला दिया। इन विमानों ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के इमाम हुसैन विश्वविद्यालय जैसे प्रमुख केंद्रों को निशाना बनाया। इस भीषण बमबारी का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं और उसके नेतृत्व के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह नष्ट करना है।
परमाणु और मिसाइल ठिकानों पर प्रहार
इजराइली सेना ने दावा किया है कि उनके निशाने पर ईरान के वे परमाणु और सैन्य ठिकाने थे जो सुरक्षा के लिए खतरा हैं। हमले में बैलिस्टिक मिसाइलों के भंडारण वाले भूमिगत ढांचों और कमान केंद्रों को मिसाइलों से पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया है। सैकड़ों सैन्य कर्मियों की मौजूदगी वाले इन ठिकानों पर हमले ने ईरानी शासन की कमर तोड़ने का काम किया है।
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बढ़ता मानवीय संकट और तबाही
ईरान में एक स्कूल में हुए विस्फोट में बड़ी संख्या में निर्दोष छात्रों की मौत ने दुनिया को झकझोर दिया है। यह विस्फोट पास के सैन्य परिसर पर हुए अमेरिकी हवाई हमलों के कारण होने की शुरुआती आशंका जताई गई है। युद्ध के चलते लेबनान से अब तक 95,000 से अधिक लोग अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर पलायन कर चुके हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर
कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने चेतावनी दी है कि यह युद्ध दुनिया की अर्थव्यवस्था को तबाह कर सकता है। शुक्रवार को अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल पार कर गई, जो दो साल में पहली बार हुआ है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर सप्लाई चेन इसी तरह बाधित रही तो तेल की कीमतें 150 डॉलर तक जा सकती हैं।
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रूस का साथ और बदलती रणनीति
खुफिया जानकारी के अनुसार रूस अब इस संघर्ष में ईरान को अमेरिकी सेना के खिलाफ सटीक जानकारी प्रदान कर रहा है। रूस और ईरान का बढ़ता सहयोग इस जंग को और अधिक जटिल बना रहा है जिससे शांति की कोशिशें विफल हो रही हैं। जैसे-जैसे संघर्ष आगे बढ़ रहा है, खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी खतरे के बादल मंडराने लगे हैं।
