कॉन्सेप्ट फोटो (डिजाइन)
US,Israel-Iran War: ईरान अब तक के अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा है। US और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला किया है। यह जंग पिछले आठ दिनों से चल रही है। ईरान उन देशों को भी टारगेट कर रहा है जहां US के बेस हैं। किसी भी देश ने खुलकर ईरान का साथ नहीं दिया है, लेकिन चीन इनडायरेक्टली ईरान का साथ दे रहा है। 2025 में ईरान और US और इजरायल के बीच जंग के बाद से चीन ईरान के और करीब आ गया है।
ईरान पर कई इंटरनेशनल हथियार बैन लगे हैं। ऑस्ट्रेलिया, US और यूरोपियन यूनियन (EU) ने ईरान को हथियारों और उनसे जुड़े सामान के एक्सपोर्ट और सप्लाई पर कड़े बैन लगाए हैं। यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल ने अगस्त 2025 में ईरान पर JCPOA (जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन) से पहले के बैन फिर से लगा दिए। चीन ने इन बैन को तोड़ने से काफी हद तक परहेज किया है।
हालांकि, पिछले साल जून में इजरायल और ईरान के बीच 12 दिन की जंग के बाद इलाके में तनाव बढ़ने से चीन और ईरान के बीच मिलिट्री कोऑपरेशन में थोड़ी बढ़ोतरी हुई। ईरान को चीन की हथियार बेचने से एक तीर से दो निशाने लगे हैं। पहला चीन को काफी डिस्काउंट पर कच्चे तेल की लगातार सप्लाई मिली और दूसरा, वह वेस्ट एशिया में सेना तैनात किए बिना लगातार US का ध्यान भटकाने में कामयाब रहा।
सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने हाल ही में चीन से एडवांस्ड सरफेस-टू-एयर मिसाइल (SAM) बैटरी खरीदी और तैनात की हैं, जिसमें HQ-9, HQ-16, और HQ-17AE शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं। इन सिस्टम्स को अब तक US-इजरायली हमलों से ईरान की न्यूक्लियर फैसिलिटी और उससे जुड़े कॉम्प्लेक्स को बचाने में बहुत कम कामयाबी मिली है।
चीन के YLC-8B एंटी-स्टील्थ रडार ने अब तक अच्छा काम किया है, हालांकि और एनालिसिस की ज़रूरत है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि इसकी लो-फ्रीक्वेंसी ऑपरेशन कैपेबिलिटीज़ ने ईरानी कमांडरों को रूस में बने डिफेंस सिस्टम की तुलना में ज्यादा दूरी से आने वाले स्टील्थ हथियारों का पता लगाने में मदद की है। हालांकि, यह कोई खास फायदा नहीं रहा है।
डिफेंस सिस्टम के अलावा चीन से ईरान की खरीद का मकसद अपने अटैकिंग हथियारों को बढ़ाना है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान चीनी CM-302 सुपरसोनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल खरीदने की डील को फाइनल कर रहा है। लेकिन, चीन ने इन खबरों को गलत बताया है।
लगभग 290 किलोमीटर की रेंज और कम ऊंचाई और तेज स्पीड पर उड़ने की क्षमता के साथ, CM-302 मिसाइल फारस की खाड़ी और अरब सागर में तैनात US एयरक्राफ्ट कैरियर और नेवी के जहाजों को निशाना बना सकती है। चीन ने जवाबी हमलों के लिए ईरान को लोइटरिंग म्यूनिशन (कामिकेज़ ड्रोन) भी दिए हैं।
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US डिपार्टमेंट ऑफ वॉर की दिसंबर 2025 की ‘चाइना मिलिट्री पावर रिपोर्ट’ में कहा गया है कि चांग गुआंग सैटेलाइट टेक्नोलॉजी कंपनी जैसी चीनी सैटेलाइट कंपनियां, ईरान के IRGC और यमन में हूती मिलिटेंट्स को इंटेलिजेंस देकर सपोर्ट कर रही हैं। जबकि मिनोस्पेस टेक्नोलॉजी कंपनी कथित तौर पर ईरान के साथ सैटेलाइट सपोर्ट देने के लिए बातचीत कर रही है।