पश्चिमी देशों का चहेता शाह रातों-रात कैसे बना विलेन? 1979 की वो बगावत जिसने दुनिया को चौंका दिया
Iran Revolution: 1979 में आयतुल्लाह खामेनेई के नेतृत्व में ईरान ने राजशाही और अमेरिकी दखल को जड़ से उखाड़ फेंका था। आज के अशांत हालातों के बीच जानिए उस ऐतिहासिक 'इस्लामी क्रांति' की पूरी कहानी।
- Written By: अमन उपाध्याय
ईरान की क्रांति , फोटो (सो. सोशल मीडिया एआई )
Iran Revolution History In Hindi: ईरान एक बार फिर गहरे राजनीतिक और आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। सड़कों पर उतरते लोग और बढ़ता जनआक्रोश दो साल पहले महसा अमीनी की मौत के बाद भड़की असंतोष की लहर को और तेज कर रहा है। मौजूदा हालात कई मायनों में 1979 की उस ऐतिहासिक उथल-पुथल की याद दिलाते हैं, जब व्यापक जनआंदोलन ने अमेरिका समर्थित शाह की मजबूत मानी जाने वाली सत्ता को चंद ही दिनों में गिरा दिया था।
1 फरवरी 1979 की सुबह ईरान के इतिहास में निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज है। करीब 15 वर्षों के निर्वासन के बाद जब अयातुल्ला रुहोल्लाह खामेनेई तेहरान लौटे, तो उन्हें देखने और सुनने के लिए लाखों लोग सड़कों पर उमड़ पड़े। इससे कुछ ही समय पहले पश्चिमी शक्तियों के करीबी सहयोगी शाह मोहम्मद रजा पहलवी देश छोड़ चुके थे। खामेनेई की वापसी के महज दस दिनों के भीतर उनके समर्थकों ने सत्ता की कमान संभाल ली और ईरान में ‘इस्लामी गणराज्य’ की स्थापना की घोषणा कर दी।
अमेरिका का दखल और ‘श्वेत क्रांति’ की विफलता
उस समय ईरान में अमेरिकी प्रभाव की जड़ें बहुत गहरी थीं। 1953 में सीआईए (CIA) की मदद से हुए तख्तापलट ने शाह की सत्ता को मजबूत किया था। शाह ने 1963 में ‘श्वेत क्रांति’ के जरिए देश का आधुनिकीकरण करने की कोशिश की जिसमें भूमि सुधार और महिलाओं के मताधिकार जैसे कदम शामिल थे। हालांकि, इस आधुनिकीकरण को धार्मिक नेताओं और रूढ़िवादी समाज ने अपनी संस्कृति पर हमले के रूप में देखा।
सम्बंधित ख़बरें
परमाणु समझौते पर गालिबाफ की ट्रंप को दो टूक चेतावनी, बोले- ईरानी अधिकारों पर समझौता मंजूर नहीं
क्या चीन की मिसाइल से गिरा अमेरिकी F-15 विमान? ईरान में हुए हादसे पर बड़ा खुलासा, ट्रंप प्रशासन में खलबली
Iran ने ठुकराईं Trump की शर्तें? परमाणु डील पर नया संकट! मिडिल ईस्ट में फिर बढ़ेगा तनाव? Video
चीन में नहीं थम रहा माइनिंग हादसों का सिलसिला, अब यूनान में खदान ढहने से 5 की मौत; सुरक्षा दावों की खोली पोल
इस्लामी क्रांति ईरान, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
1978 में ईरान में क्या हुआ था?
1978 के दौरान तेहरान, कोम और तबरीज जैसे शहरों में विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हुआ और फिर अगस्त 1978 में अबादान के एक सिनेमाघर में आगजनी हुई, जिसमें 400 से अधिक लोग जिंदा जल गए। खामेनेई ने इसका दोष शाह की खुफिया एजेंसी ‘सावक’ पर मढ़ा, जिससे जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। तेल उद्योग के श्रमिकों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल ने अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी, जिससे शाह के पास देश छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
शाह के पतन के बाद ईरान में क्या हुआ?
शाह के पतन के बाद जब खामेनेई सत्ता के केंद्र में आए तो विपक्ष के कई लोगों का मानना था कि नए ईरान में उनकी भूमिका मुख्य रूप से आध्यात्मिक मार्गदर्शक और एक नेता तक सीमित रहेगी। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग निकली। खामेनेई और उनके करीबी सहयोगियों ने तेजी से ऐसे इस्लामी गणतंत्र की नींव रखनी शुरू कर दी, जिसकी पूरी शासन-व्यवस्था इस्लामी सिद्धांतों पर आधारित हो और सत्ता उन लोगों के हाथ में हो जो धर्म की व्याख्या करने का दावा करते थे यानी धार्मिक नेतृत्व।
1979 ईरानी क्रांति, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
साल 1979 के दौरान खामेनेई और उनके समर्थकों ने व्यवस्थित तरीके से हर विरोधी शक्ति और हर असहमति को किनारे करना शुरू किया। कई विरोधियों को देश छोड़ने पर मजबूर किया गया, जबकि कुछ ने सत्ता के साथ अस्थायी समझौते किए। हालांकि, समय के साथ उन्हें भी एक-एक कर ईरान की राजनीतिक व्यवस्था से बाहर कर दिया गया। इसके बावजूद नागरिक समाज के कुछ हिस्से जीवित रहे और समय-समय पर सरकारी नीतियों तथा धार्मिक दमन के खिलाफ आवाज उठाते रहे, लेकिन मजबूत और केंद्रीकृत इस्लामी शासन के सामने ये प्रतिरोध अंततः कमजोर पड़ते चले गए।
कैसे खत्म हुआ ईरान-अमेरिका का रिश्ता?
क्रांति के बाद दो बड़ी घटनाओं ने अमेरिका और ईरान के रिश्तों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया। 1979 में कट्टरपंथी छात्रों ने तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास पर हमला कर दर्जनों राजनयिकों को बंधक बना लिया। यह संकट 444 दिनों तक चला, जिसने वैश्विक स्तर पर अमेरिका की छवि को भारी चोट पहुंचाई। इस घटना ने न केवल अमेरिका को ईरान से भागने पर मजबूर किया, बल्कि 1980 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों को भी प्रभावित किया।
यह भी पढ़ें: – ईरान में खौफ! खामेनेई के खिलाफ आवाज उठाने वाले इरफान को दी जाएगी फांसी, आंदोलन में पहली मौत की सजा
अब सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा हो गया है कि क्या इतिहास खुद को दोहरा रहा है? आज फिर ईरान में अराजकता है। आर्थिक संकट और धार्मिक दमन के खिलाफ लोग सड़कों पर हैं। 1979 में जहां धर्मगुरुओं ने राजशाही को हटाया था, आज नागरिक समाज उसी धार्मिक नियंत्रण के खिलाफ आवाज उठा रहा है।
