वैश्विक तेल संकट (सोर्स-सोशल मीडिया)
Global Oil Supply Stability: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के कारण दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल की आशंका बनी हुई है। इस वैश्विक संकट के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने अपने आपातकालीन तेल भंडार को बाजार में उतारने का एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। भारत सरकार ने इस कदम का खुले दिल से स्वागत करते हुए कहा है कि यह आपूर्ति बाधाओं को कम करने में सहायक होगा। वैश्विक तेल आपूर्ति स्थिरता को बनाए रखने के लिए भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय समुदायों और सहयोगियों के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जता रहा है।
ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है जिसे देखते हुए IEA के 32 सदस्य देशों ने मिलकर 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने पर सहमति जताई है। भारत ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि वह ऊर्जा बाजार की स्थितियों और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर बहुत बारीकी से नजर रख रहा है।
सरकार का मानना है कि यह समन्वित कदम बाजार में स्थिरता लाने और कीमतों को बेकाबू होने से रोकने के लिए समय की सबसे बड़ी जरूरत है। भारत IEA का एक महत्वपूर्ण सहयोगी सदस्य है और वह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सहयोग में सक्रिय रूप से भाग लेने और हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है।
28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होने वाला तेल निर्यात बुरी तरह गिर गया है जो अब पहले के मुकाबले केवल 10 प्रतिशत ही रह गया है। यह मार्ग दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा संभालता है जिससे इसकी महत्ता का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
साल 2025 के आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन करीब 2 करोड़ बैरल तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता था जो अब युद्ध की वजह से बहुत बड़े संकट में है। IEA के अनुसार इस मार्ग का कोई प्रभावी वैकल्पिक रास्ता मौजूद नहीं है जिसके कारण पूरे विश्व में ऊर्जा संकट का खतरा और गहरा गया है।
यह IEA के 1974 में गठन के बाद से अब तक का केवल छठा अवसर है जब इस तरह का समन्वित आपातकालीन तेल भंडार जारी करने का निर्णय लिया गया है। इससे पहले साल 1991, 2005, 2011 और 2022 में दो बार ऐसे विशेष कदम वैश्विक ऊर्जा संकटों के दौरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा उठाए गए थे।
वर्तमान में IEA सदस्य देशों के पास कुल 1.2 अरब बैरल से अधिक का आपातकालीन तेल भंडार सुरक्षित है जो केवल संकट के समय ही निकाला जाता है। इसके अलावा उद्योगों के पास भी करीब 60 करोड़ बैरल का अतिरिक्त स्टॉक मौजूद है जो सरकारी नियमों के तहत अनिवार्य रूप से रखा जाता है।
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कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने सदस्य देशों की विशेष बैठक बुलाकर बाजार की गंभीर स्थिति का आकलन किया और इस बड़े फैसले पर सबकी सहमति बनाई। इस कदम से उन तेल उत्पादकों को राहत मिलने की उम्मीद है जिन्होंने युद्ध और आपूर्ति की भारी कमी के कारण अपना उत्पादन कम कर दिया था।
भारत जैसे विकासशील देशों के लिए तेल की कीमतों में स्थिरता देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता की जेब पर पड़ने वाले बोझ को कम करने के लिए अनिवार्य है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में यह भंडार बाजार में आने से वैश्विक तेल व्यापार में आई रुकावटें कुछ हद तक कम हो सकेंगी।