भारत और यूएई ने 2032 तक व्यापार को 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का रखा बड़ा लक्ष्य

Strategic Economic Integration: प्रधानमंत्री मोदी और UAE के राष्ट्रपति ने 2032 तक व्यापार को 200 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा है। इसमें ऊर्जा, अंतरिक्ष और परमाणु तकनीक जैसे क्षेत्रों पर जोर दिया जाएगा।
India and UAE Set Ambitious $200 Billion Trade Target for 2032 Strategic Partnership
यूएई के राष्ट्रपति और पीएम मोदी, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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India-UAE bilateral trade goals: भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने अपनी आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नए शिखर पर ले जाने का संकल्प लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच हुई बैठक में भविष्य की रूपरेखा तैयार की गई। दोनों देशों ने व्यापार को दोगुना करने के साथ-साथ निवेश और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का बड़ा निर्णय लिया है। यह साझा विजन आने वाले वर्षों में दक्षिण एशिया और खाड़ी क्षेत्र के आर्थिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल सकता है।

व्यापार का बड़ा लक्ष्य और एमएसएमई

दोनों नेताओं ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह व्यापार पहले ही 100 अरब डॉलर के आंकड़े को छू चुका है जो एक बड़ी उपलब्धि है। यह वृद्धि 2022 में हुए व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) के बाद से लगातार जारी आर्थिक सहयोग का परिणाम है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को आपस में जोड़ने के लिए दोनों देशों की टीमों को विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए ‘भारत मार्ट’ और ‘भारत–अफ्रीका सेतु’ जैसी प्रमुख पहलों के शीघ्र क्रियान्वयन का आह्वान किया गया है। इन प्रयासों का उद्देश्य मध्य पूर्व, अफ्रीका और यूरेशिया क्षेत्र में एमएसएमई उत्पादों को प्रभावी ढंग से बढ़ावा देना है।

बुनियादी ढांचा और धोलेरा निवेश

गुजरात के धोलेरा में विशेष निवेश क्षेत्र विकसित करने के लिए यूएई की संभावित भागीदारी का पुरजोर स्वागत किया गया है। यहां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, ग्रीनफील्ड बंदरगाह और पायलट प्रशिक्षण स्कूल जैसे महत्वपूर्ण ढांचे विकसित करने की परिकल्पना की गई है। इसके अलावा स्मार्ट शहरी टाउनशिप और रेलवे कनेक्टिविटी के माध्यम से क्षेत्र की ऊर्जा अवसंरचना को भी मजबूत किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई के सॉवरेन वेल्थ फंड्स को 2026 के दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में भागीदारी का निमंत्रण दिया है। गिफ्ट सिटी में डीपी वर्ल्ड और फर्स्ट अबू धाबी बैंक की शाखाओं की स्थापना से वित्तीय सहयोग और गहरा होगा। ये बैंक शाखाएं भारतीय कंपनियों को खाड़ी सहयोग परिषद और उत्तरी अफ्रीका के बाजारों से जोड़ने में मदद करेंगी।

ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा सहयोग

सतत खाद्य सुरक्षा के लिए दोनों देशों ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है और इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना है। इसके तहत सतत कृषि और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नवाचार और ज्ञान का आदान-प्रदान होगा। दोनों पक्षों ने भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी की भूमिका पर विशेष जोर दिया है। ऊर्जा क्षेत्र में द्विपक्षीय साझेदारी को नया आयाम देते हुए एक महत्वपूर्ण 10 वर्षीय एलएनजी समझौता किया गया है। एचपीसीएल और एडीएनओसी गैस के बीच हुए इस समझौते के तहत 2028 से एलएनजी की नियमित आपूर्ति होगी। भारत को प्रति वर्ष 0.5 मिलियन टन एलएनजी प्राप्त होगी जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा को बड़ी मजबूती मिलेगी।

परमाणु और उन्नत तकनीक

भारत और यूएई अब उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स के विकास में साझेदारी की संभावनाएं तलाशेंगे। दोनों पक्ष परमाणु संयंत्रों के संचालन, रखरखाव और परमाणु सुरक्षा में आपसी सहयोग बढ़ाने पर पूरी तरह सहमत हुए हैं। यह सहयोग भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा और दूरदर्शी कदम साबित होगा।

सीमा-पार भुगतान को अधिक सस्ता और तेज बनाने के लिए दोनों देशों के राष्ट्रीय भुगतान प्लेटफॉर्म्स को जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उभरती प्रौद्योगिकियों में नवाचार को बढ़ावा देने का भी साझा निर्णय लिया गया है। भारत में सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर और डेटा सेंटर स्थापित करने के फैसले से डिजिटल क्रांति को नई गति प्राप्त होगी।

अंतरिक्ष और रोजगार सृजन

अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से वाणिज्यिक सेवाओं का विस्तार करने के लिए एक संयुक्त पहल की जाएगी। इसका उद्देश्य एक एकीकृत अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना और संयुक्त भारत–यूएई मिशनों को सक्षम बनाना है। यह पहल भविष्य में उच्च-कौशल वाले रोजगार पैदा करने और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

दोनों देशों के बीच हुए ये समझौते निवेश प्रवाह को मजबूत करने और सतत व्यावसायिक मॉडल विकसित करने में सहायक होंगे। आने वाले समय में यह रणनीतिक रोडमैप भारत और यूएई के संबंधों को एक नई वैश्विक पहचान दिलाएगा। व्यापारिक लक्ष्यों की प्राप्ति के साथ-साथ यह साझेदारी दोनों देशों के नागरिकों की समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगी।

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