दिल्ली में सजेगा 22 अरब देशों का दरबार, पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत बनेगा ग्लोबल डिप्लोमैटिक हब
IMEC Corridor: भारत 30-31 जनवरी को 22 अरब देशों के विदेश मंत्रियों की मेजबानी करेगा। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच यह बैठक ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग के लिहाज से बेहद अहम है।
- Written By: अमन उपाध्याय
अरब लीग की मेजबानी करेगा भारत, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
India-Arab Foreign Ministers Meeting: भारत की राजधानी दिल्ली एक बार फिर वैश्विक कूटनीति का केंद्र बनने जा रही है। भारत 30 और 31 जनवरी 2026 को दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करने के लिए तैयार है।
इस उच्चस्तरीय सम्मेलन में अरब लीग के लगभग 22 सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के शामिल होने की संभावना है जो पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और अस्थिरता के बीच भारत की बढ़ती कूटनीतिक हैसियत का एक बड़ा संकेत है।
संकट के बीच ‘ब्रिज पावर’ बनेगा भारत
यह महत्वपूर्ण सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब गाजा युद्ध, ईरान-इजरायल तनाव और लाल सागर में हूती विद्रोहियों के हमलों ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर रखा है। जहां अरब दुनिया इन मुद्दों पर बंटी हुई नजर आती है, वहीं भारत का सभी पक्षों से संवाद बनाए रखना यह साबित करता है कि नई दिल्ली किसी एक गुट के साथ खड़े होने के बजाय संतुलन साधने वाली ‘ब्रिज पावर’ की भूमिका निभा रही है।
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बैठक में कौन से देश होंगे शामिल?
सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, ओमान, बहरीन, जॉर्डन, इराक, लेबनान, सीरिया, मोरक्को, ट्यूनीशिया, अल्जीरिया, लीबिया, सूडान, सोमालिया, जिबूती, मॉरिटानिया, कोमोरोस, यमन और फिलिस्तीन जैसे प्रमुख अरब देशों के भाग लेने की उम्मीद है।
ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक एजेंडा
भारत के लिए यह बैठक ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से लगभग 60% आपूर्ति अरब देशों से होती है। इसके अलावा, बैठक में निम्नलिखित मुख्य मुद्दों पर चर्चा होगी:
- IMEC कॉरिडोर: चीन की ‘बेल्ट एंड रोड’ पहल के विकल्प के रूप में प्रस्तावित इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर पर रणनीतिक बातचीत।
- आतंकवाद और समुद्री सुरक्षा: लाल सागर में सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता।
- व्यापार और निवेश: भारत और अरब देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाना।
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पाकिस्तान का घटता प्रभाव और प्रवासी भारतीयों का मुद्दा
यह सम्मेलन पाकिस्तान के लिए एक कड़ा संदेश भी है क्योंकि अब अरब देशों का रणनीतिक और आर्थिक झुकाव भारत की ओर बढ़ रहा है। साथ ही, 90 लाख भारतीय नागरिक खाड़ी देशों में काम करते हैं जिनसे हर साल 80 से 85 अरब डॉलर की रेमिटेंस आती है। बैठक के दौरान उनकी सुरक्षा, वीजा नियमों और संकट के समय उनकी सुरक्षित निकासी जैसे मानवीय पहलुओं पर भी गहन चर्चा होने की संभावना है।
