नेतन्याहू का बड़ा यू-टर्न! जिस तुर्की और कतर का किया था विरोध, अब उन्हीं के साथ गाजा पर लेंगे फैसला

Trump Gaza Board of Peace: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के आगे झुकते हुए इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने 'गाजा बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने का न्योता स्वीकार कर लिया है।
Netanyahu makes a major U-turn; after opposing Türkiye and Qatar, he will now make decisions on Gaza in collaboration with them.
बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रम्प, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Israel On Gaza Board Of Peace: इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बड़ा कूटनीतिक यू-टर्न लेते हुए डोनाल्ड ट्रंप के 'गाजा बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। नेतन्याहू के कार्यालय ने बुधवार को इस ऐतिहासिक फैसले का आधिकारिक ऐलान किया जिसके बाद अब इजरायल इस बोर्ड का एक संस्थापक सदस्य बन जाएगा।

यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले इजरायल ने इस परिषद में तुर्की, कतर और पाकिस्तान जैसे देशों को शामिल किए जाने का कड़ा विरोध किया था।

ट्रंप की चेतावनी और इजरायल का डर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप के सख्त तेवरों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गाजा के मुद्दे पर अकेले पड़ जाने के डर से नेतन्याहू को अपना विरोध छोड़ना पड़ा है। ट्रंप ने हाल ही में गाजा बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने से इनकार करने पर फ्रांस को कड़ी चेतावनी दी थी, जिसमें उन्होंने फ्रांसीसी शराब पर 200 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि नेतन्याहू इस प्रस्ताव को ठुकरा देते तो यह अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए बड़ी शर्मिंदगी का कारण बनता और इजरायल इस महत्वपूर्ण समूह पर अपना प्रभाव खो सकता था।

कैसा होगा 'गाजा बोर्ड ऑफ पीस'?

इस नवगठित परिषद के चेयरमैन खुद डोनाल्ड ट्रंप होंगे। इस बोर्ड में शामिल होने वाले प्रत्येक देश को 1 अरब डॉलर का फंड देना होगा। इजरायल के साथ-साथ अब तुर्की, कतर, रूस, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और अजरबैजान जैसे देश इस परिषद की बैठकों में शामिल होंगे। खास बात यह है कि इस बोर्ड में इजरायल के पास भी अन्य देशों के समान वोटिंग का अधिकार होगा। यह परिषद ही आने वाले समय में गाजा के पुनर्निर्माण, उसके भविष्य और इजरायल की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लेगी।

संयुक्त राष्ट्र के अस्तित्व पर सवाल

डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि यह 'बोर्ड ऑफ पीस' भविष्य में संयुक्त राष्ट्र का स्थान ले सकता है। ट्रंप का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र ने कभी भी अपनी पूरी क्षमता के साथ काम नहीं किया और वह गाजा जैसे संकटों को सुलझाने में प्रभावी भूमिका निभाने में विफल रहा है।

ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अगर संयुक्त राष्ट्र ने सही कदम उठाए होते तो इस नए बोर्ड की जरूरत ही नहीं पड़ती। उन्होंने दावा किया कि अपने दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष में उन्होंने आठ युद्धों को सुलझाया है जिसमें उन्हें संयुक्त राष्ट्र से कोई मदद नहीं मिली।

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