
भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर (सोर्स- सोशल मीडिया)
Jaishankar Will Visit Ottawa: भारत-कनाडा के रिश्तों में लंबे समय से जमी बर्फ पिघलती नजर आ रही है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर 11 से 13 नवंबर तक कनाडा दौरे पर रहेंगे। यह उनकी पहली यात्रा होगी जब दोनों देशों के बीच खालिस्तान विवाद के बाद तनाव के माहौल में बातचीत का नया दौर शुरू होगा। जयशंकर 12 नवंबर को ओटावा में जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
यह दौरा तब हो रहा है जब कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने उन्हें जी7 में “आउटरीच पार्टनर” के रूप में आमंत्रित किया। यह बैठक कनाडा की 2025 जी7 अध्यक्षता के तहत नीगारा में आयोजित की जा रही है। मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर इस अवसर पर जी7 देशों अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और ब्रिटेन के विदेश मंत्रियों से भी मुलाकात करेंगे।
जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में भारत-कनाडा के रिश्ते खालिस्तान समर्थक गतिविधियों को लेकर बिगड़ गए थे। हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद तो स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई थी। हालांकि भारत ने ट्रूडो सरकार के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। लेकिन अब मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद रिश्तों में सुधार की संभावनाएं बढ़ी हैं।
एस. जयशंकर और अनीता आनंद के बीच यह पहली सीधी मुलाकात होगी। मंत्रालय ने बताया कि दोनों देश व्यापार समझौते (Trade Pact) को फिर से जीवित करने की दिशा में बात आगे बढ़ा सकते हैं। साथ ही, दोनों मंत्री वैश्विक मुद्दों जैसे यूक्रेन संकट, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और जलवायु परिवर्तन पर चर्चा करेंगे।
जयशंकर 13 नवंबर तक विभिन्न जी7 पार्टनर्स ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया से भी मिलेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी बल्कि भारत की “वसुधैव कुटुंबकम” नीति को भी वैश्विक मंच पर मजबूती से पेश करेगी।
हालांकि विश्व सिख संगठन (WSO) ने जयशंकर की यात्रा पर सिख समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है, लेकिन विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह मुद्दा भारत-कनाडा के द्विपक्षीय संवाद का हिस्सा है।
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विश्लेषकों का कहना है कि यह यात्रा भारत की कूटनीतिक ताकत को नए स्तर पर ले जाएगी। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने जी20 और ब्रिक्स जैसे मंचों पर अपनी भूमिका को मजबूती से स्थापित किया है। ऐसे में कनाडा के साथ रिश्तों में सुधार भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से अहम साबित हो सकता है।






