तनाव के बावजूद कैसे बने रहें जवान और ऊर्जावान, पढ़ें पूरी खबर
- Written By: वैष्णवी वंजारी
डबलिन: थोड़ा तनाव आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन बहुत अधिक तनाव से घबराहट, अवसाद और स्वास्थ्य संबंधी अन्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं, इसलिए यदि आप जल्दी बुढ़े नहीं होना चाहते हैं, तो तनाव का प्रबंधन सीखना महत्वपूर्ण है। अध्ययनों में दिखाया गया है कि जो लोग अपने तनाव का प्रबंधन नहीं कर पाते हैं, उनकी समय से पूर्व मौत का खतरा 43 प्रतिशत बढ़ जाता है। इसका कारण डीएनए पर तनाव के कारण पड़ने वाला प्रभाव हो सकता है।
डीएनए (लाल रक्त कोशिकाओं को छोड़कर) लगभग हर कोशिका में पाया जाता है। आपकी कोशिकाएं लगातार अपनी प्रतियां बनाती है और कभी-कभी इस प्रक्रिया के दौरान गलतियां भी हो जाती हैं, खासकर डीएनए के स्तर पर। इन गलतियों के कारण डीएनए में बदलाव होते हैं, जिसके चलते कोशिका कैंसरजनक बन जाती है। कोशिकाओं में इन गलतियों से बचने के लिए डीएनए के अंत पर सुरक्षात्मक टोपियां लगी होती हैं, जिन्हें टेलोमेयर कहा जाता है।
तनाव प्रबंधन हमारे नियंत्रण से परे नहीं है। धूम्रपान, अत्यधिक शराब पीना, अधिक वजन होना और तनाव के कारण टेलोमेयर को नुकसान पहुंचता है। व्यक्ति जब अत्यधिक तनाव में होता है, तो टेलोमेरेज अच्छे से काम नहीं कर पाते और इसके कारण वह समय से पहले बुढ़े लगने लगता है। टेलोमेरेज मानव कोशिकाओं का एक अनिवार्य हिस्सा हैं जो हमारी कोशिकाओं की आयु को प्रभावित करते हैं। जीवनशैली में सुधार करके और खान-पान की अच्छी आदतों से इस प्रक्रिया को पलटा जा सकता है।
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इसके अलावा कड़ा व्यायाम करने जैसी शारीरिक गतिविधियों से भी टेलोमेरेज गतिविधि बढ़ सकती है, यानी स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी की जा सकती है। तनाव का प्रबंधन करके भी स्वयं को अधिक समय तक जवान रखा जा सकता है। जैसा कि हमने पहले भी जिक्र किया है, तनाव हमेशा बुरा नहीं होता।
मनोविज्ञान के अनुसार सकारात्मक तनाव और नकारात्मक तनाव में अंतर है। सकारात्मक तनाव काम, खेलों और संबंधों में सफल होने के लिए आवश्यक है। जब तनाव इतना अधिक बढ़ जाता है कि उसका प्रबंधन मुश्किल हो जाता है, तो उसे नकारात्मक तनाव कहते है और यह आपकी कोशिकाओं को बुजुर्ग बनाने की प्रक्रिया तेज कर सकता है।
इसलिए स्वयं को हर प्रकार के तनाव से बचाने की आवश्यकता नहीं है। केवल नकारात्मक तनाव को दूर रखने की जरूरत है। समस्या का समाधान करने, सामाजिक सहयोग लेने और तनाव से निपटने की प्रभावी रणनीतियां अपनाने के अलावा सचेत रहना भी तनाव के प्रबंधन में मददगार हो सकता है।
इसके अलावा, किताब पढ़कर, संगीत सुनकर या कम्प्यूटर पर गेम खेलने समेत सकारात्मक भावनाएं पैदा करने वाली गतिविधियों से तनाव कम किया जा सकता है। यदि अपनी जीवनशैली में बदलाव करके तनाव से निपटने में मदद मिल सकती है, तो आप इन बदलावों को जरूर अपनाना चाहेंगे और इससे आपकी आयु बढ़ सकती है। (एजेंसी)
