सजा-ए-मौत में चीन ने सबको पछाड़ा, 30 दिन में 15 को फांसी; सऊदी अरब और ईरान को भी छोड़ा पीछे
China Execution Record: साल 2026 की शुरुआत में चीन ने फांसी देने के मामले में सऊदी अरब और ईरान को पीछे छोड़ दिया है। जनवरी में म्यांमार के 'स्कैम' परिवारों के 15 सदस्यों को फांसी दी गई।
- Written By: अमन उपाध्याय
सजा-ए-मौत में चीन ने सबको पछाड़ा, फोटो (सो. एआई)
China News In Hindi: चीन ने साल 2026 की शुरुआत में एक बड़ा उछाल दर्ज किया है। स्रोतों के अनुसार, जनवरी 2026 के केवल 30 दिनों के भीतर चीन ने कुल 15 लोगों को फांसी की सजा दी है। यह आंकड़ा इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि साल 2025 में फांसी देने में सबसे आगे रहने वाले देश, सऊदी अरब और ईरान, इस साल की शुरुआत में चीन से पीछे रह गए हैं। जनवरी महीने में सऊदी अरब में केवल एक फांसी हुई, जबकि ईरान में एक भी फांसी का मामला दर्ज नहीं किया गया।
म्यांमार के ‘स्कैम परिवारों’ पर कड़ा प्रहार
चीन द्वारा दी गई इन हालिया सजाओं का संबंध म्यांमार सीमा पर सक्रिय संगठित अपराधों से है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने म्यांमार के उन कुख्यात परिवारों को निशाना बनाया है जिन्होंने एक पूरे कस्बे को जुआ, ड्रग्स और ऑनलाइन धोखाधड़ी के अड्डे में तब्दील कर दिया था। इनमें मिंग परिवार के 11 सदस्यों को 29 जनवरी को मौत की सजा सुनाई गई, जबकि बाय परिवार के 4 सदस्यों को धोखाधड़ी और अन्य गंभीर अपराधों में दोषी पाए जाने पर फांसी की सजा दी गई।ो
सऊदी और ईरान का पिछला रिकॉर्ड
आंकड़ों की तुलना करें तो साल 2025 में सऊदी अरब ने 356 लोगों को फांसी दी थी, जो उसका अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड था। इसमें से 243 लोगों को सख्त ड्रग्स विरोधी नीतियों के तहत सजा दी गई थी। वहीं, एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, 2024 में ईरान में 972 लोगों को फांसी दी गई थी। हालांकि, चीन अपने फांसी के आंकड़ों को कभी सार्वजनिक नहीं करता और इन्हें राजकीय गोपनीय जानकारी माना जाता है, लेकिन 2026 की शुरुआती रिपोर्टों ने उसे शीर्ष पर ला खड़ा किया है।
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अपराधों पर चीन की जीरो टॉलरेंस नीति
विशेषज्ञों का मानना है कि म्यांमार सीमा पर बढ़ते साइबर अपराधों और ‘पिग बुचरिंग’ स्कैम्स के कारण चीन ने अपने नागरिकों की सुरक्षा के नाम पर यह कड़ा रुख अपनाया है। सीमा पार से संचालित होने वाले इन अड्डों ने चीन की आंतरिक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाया था, जिसके जवाब में इन चार प्रमुख आपराधिक परिवारों के नेटवर्क को ध्वस्त कर दोषियों को सजा-ए-मौत दी गई है।
