नईम कासिम, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Naim Qassem Speech On Iran Israel Conflict: मिडिल ईस्ट में ईरान युद्ध और बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच लेबनानी प्रतिरोध आंदोलन हिजबुल्लाह ने एक बड़ा और निर्णायक रुख अख्तियार कर लिया है। हिजबुल्लाह के महासचिव शेख नईम कासिम ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका संगठन किसी भी कीमत पर आत्मसमर्पण नहीं करेगा।
कासिम के अनुसार, लेबनान इस समय एक ऐसे नाजुक मोड़ पर खड़ा है जहां उसके सामने केवल दो ही विकल्प हैं या तो वह अपनी भूमि, गरिमा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का त्याग कर आत्मसमर्पण कर दे या फिर डटकर मुकाबले का रास्ता चुने।
प्रेस टीवी की रिपोर्टों के अनुसार, हिजबुल्लाह प्रमुख ने वर्तमान संकट को लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता के लिए एक ‘अस्तित्वगत संघर्ष’ करार दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सेनाएं अमेरिका-इजरायल की साझा सैन्य परियोजनाओं का मुकाबला करने के लिए किसी भी सीमा तक बलिदान देने को तैयार हैं।
कासिम का तर्क है कि प्रतिरोध की सक्रिय नीति के कारण ही इजरायल को लेबनान पर अचानक हमला करने या घुसपैठ के बहाने बनाने का मौका नहीं मिला है। उन्होंने अपने लड़ाकों की वीरता की सराहना करते हुए कहा कि वे देशभक्ति और गरिमा के नए महाकाव्य लिख रहे हैं।
अपने संबोधन में शेख नईम कासिम ने एक कथित ‘ग्रेटर इजरायल‘ की विस्तारवादी योजना का जिक्र करते हुए दुनिया को आगाह किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल मिलकर नील नदी से यूफ्रेट्स नदी तक क्षेत्रीय नियंत्रण स्थापित करना चाहते हैं, जिसमें लेबनान का हिस्सा भी शामिल है। उनके अनुसार, इजरायली आक्रमण 2024 के अंत से लगातार जारी है और इजरायल ने पिछले सभी युद्धविराम समझौतों का बार-बार उल्लंघन किया है।
हिजबुल्लाह प्रमुख ने स्पष्ट किया कि जब तक युद्ध जारी है और गोलीबारी हो रही है, तब तक इजरायली दुश्मन के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत नहीं की जाएगी। उन्होंने ऐसी किसी भी चर्चा को ‘जबरन आत्मसमर्पण’ के समान बताया। घरेलू मोर्चे पर बोलते हुए, कासिम ने लेबनानी सरकार से उन कानूनों को रद्द करने का आग्रह किया जो प्रतिरोध या हथियारों को ‘अपराध’ की श्रेणी में रखते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर देश खतरे में है तो हथियारों का एकाधिकार केवल लेबनान के पतन का कारण बनेगा और ‘ग्रेटर इजरायल’ योजना को बल देगा।
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कासिम ने उन लेबनानी नागरिकों की भी प्रशंसा की जो विस्थापित होने के बावजूद प्रतिरोध के रास्ते पर अडिग हैं। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह स्पष्ट है कि हिजबुल्लाह अब एक लंबी और भीषण सैन्य लड़ाई के लिए तैयार है जो पूरे मिडिल ईस्ट के समीकरणों को बदल सकती है।