खतरे में तक्षशिला! यूनेस्को की ‘डेंजर लिस्ट’ में शामिल होने की कगार पर ये ऐतिहासिक धरोहर, पाक की साख दांव पर

Taxila Pakistan Heritage: पाक के ऐतिहासिक स्थल तक्षशिला पर यूनेस्को की 'डेंजर लिस्ट' में शामिल होने का खतरा है। मरम्मत में सीमेंट के इस्तेमाल और विभागीय खींचतान से अंतरराष्ट्रीय चिंताएं बढ़ गई है।
Taxila in Peril! This Historical Heritage Site Stands on the Brink of Inclusion in UNESCO's 'Danger List'—Pakistan's Reputation at Stake.
तक्षशिला, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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UNESCO Heritage Danger List Taxila: पाकिस्तान की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक तक्षशिला एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा और विवादों के केंद्र में है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, तक्षशिला सहित पाकिस्तान के कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों पर यूनेस्को की World Heritage in Danger List में शामिल होने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। यह संकट इन स्थलों के रखरखाव में बरती जा रही कथित कोताही और संबंधित सरकारी विभागों के बीच चल रही आपसी खींचतान के कारण पैदा हुआ है।

मोहरा मोरादू और सरकैप पर विवाद

मुख्य विवाद 'मोहरा मोरादू' और 'सरकैप' जैसे विश्व प्रसिद्ध पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण कार्य से जुड़ा है। प्रमुख मीडिया आउटलेट 'डॉन' के अनुसार, इन स्थलों पर मरम्मत और पुनर्निर्माण के दौरान मूल ऐतिहासिक संरचनाओं में अवांछित बदलाव किए जाने की शिकायतें मिली हैं। इन शिकायतों में दीवारों को असामान्य रूप से ऊंचा करने और निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर सीमेंट के उपयोग जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। मामला इतना संवेदनशील हो गया है कि इसकी आधिकारिक शिकायत पेरिस में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि तक पहुंंच चुकी है।

यूनेस्को के मानक

पाकिस्तान के पुरातत्व और संग्रहालय विभाग (DOAM) ने इन कार्यों को संरक्षण मानकों का गंभीर उल्लंघन करार दिया है। विभाग के अनुसार, विश्व धरोहर स्थलों पर सीमेंट का उपयोग उनकी ऐतिहासिक प्रामाणिकता और अखंडता को भारी नुकसान पहुंचाता है, जो सीधे तौर पर यूनेस्को के अंतरराष्ट्रीय संरक्षण मानकों के खिलाफ है। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इन गलतियों को नहीं सुधारा गया तो तक्षशिला को ‘डेंजर लिस्ट’ में डाल दिया जाएगा जिससे भविष्य में इसका 'विश्व धरोहर' का दर्जा भी छिन सकता है।

तक्षशिला का ऐतिहासिक गौरव

तक्षशिला का ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व अतुलनीय है। साल 1980 में 'तक्षशिला आर्कियोलॉजिकल कॉम्प्लेक्स' को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा दिया गया था। यह परिसर कुल 18 पुरातात्विक स्थलों का एक समूह है जो नवपाषाण काल से लेकर 5वीं शताब्दी तक के शहरी विकास, शिक्षा और बौद्ध संस्कृति के प्रसार की एक विस्तृत कहानी बयां करता है।

विभागीय सफाई और पंजाब पुरातत्व का पक्ष

दूसरी ओर, पंजाब के पुरातत्व विभाग ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। विभाग के महानिदेशक का दावा है कि ये सभी कार्य जरूरी संरक्षण के तहत किए गए हैं ताकि पुरानी संरचनाओं को और अधिक खराब होने से बचाया जा सके।

उनका तर्क है कि सभी मरम्मत कार्य अंतरराष्ट्रीय मानकों और जॉन मार्शल जैसे विशेषज्ञों के ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर किए गए हैं और मूल ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि विभाग पुराने 'गलत' कंक्रीट कार्यों को हटा रहा है और प्राचीन जलकुंडों जैसी लुप्त विशेषताओं को पुनर्जीवित कर रहा है। इसके अलावा, पर्यटकों के लिए सुविधाएं मुख्य ऐतिहासिक क्षेत्र के बफर जोन के बाहर विकसित की जा रही हैं।

वैश्विक साख पर खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान अपने कई अन्य ऐतिहासिक स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के प्रयास कर रहा है। ऐसे में संरक्षण की तकनीकों और विभागीय तालमेल पर उठ रहे ये सवाल वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान की साख को प्रभावित कर सकते हैं।

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