ट्रंप के शांति प्लान को हमास की चुनौती, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Trump Peace Plan Gaza: गाजा पट्टी में एक तरफ जहां युद्धविराम के बाद शांति बहाली की कोशिशें तेज हो रही हैं वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही संकेत दे रही है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमास ने गाजा में अपनी प्रशासनिक पकड़ को फिर से मजबूत करना शुरू कर दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, हमास ने गाजा के पांच प्रमुख जिलों में नए जिला राज्यपालों की नियुक्ति की है। गौर करने वाली बात यह है कि इन सभी नए अधिकारियों का संबंध हमास की सशस्त्र शाखा ‘अल-कस्साम ब्रिगेड’ से रहा है। इसके साथ ही अर्थव्यवस्था और आंतरिक मंत्रालयों में भी बड़े पैमाने पर फेरबदल किया गया है।
हाल ही में स्वास्थ्य मंत्रालय के एक नए डिप्टी मंत्री को अस्पतालों का दौरा करते हुए देखा गया जो इस बात का प्रमाण है कि हमास का प्रशासनिक ढांचा एक बार फिर सक्रिय हो चुका है।
प्रशासनिक बदलावों के साथ-साथ हमास ने अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए टैक्स वसूली भी तेज कर दी है। विशेष रूप से ‘येलो लाइन’ यानी हमास के प्रभाव वाले इलाकों में निजी कारोबारियों से शुल्क लिया जा रहा है। तस्करी के जरिए आने वाली वस्तुओं जैसे सिगरेट, मोबाइल फोन, सोलर पैनल और बैटरियों पर भारी टैक्स लगाया जा रहा है।
इस वसूली से हमास को लाखों शेकेल की आय हो रही है। इसी फंड का इस्तेमाल करते हुए हमास अपने लड़ाकों और सरकारी कर्मचारियों को औसतन 1,500 शेकेल (करीब 500 डॉलर) का मासिक वेतन भी बांट रहा है।
हमास की यह सक्रियता राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शांति योजना के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। ट्रंप के प्लान के मुताबिक, गाजा में एक ‘टेक्नोक्रेट समिति’ के जरिए अंतरिम प्रशासन चलाया जाना है जिसकी अगुवाई पूर्व फिलिस्तीनी अधिकारी अली शाथ करेंगे। इस योजना की शर्त यह है कि हमास को हथियार छोड़ने होंगे और सत्ता से पूरी तरह अलग होना होगा।
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हालांकि, हमास का दावा है कि वह प्रशासन सौंपने को तैयार है लेकिन उसका आरोप है कि इजरायल ने प्रस्तावित समिति के सदस्यों को गाजा में प्रवेश की अनुमति नहीं दी है। दूसरी ओर, इजरायल का रुख पूरी तरह स्पष्ट है गाजा के भविष्य के शासन में हमास की किसी भी प्रकार की भूमिका स्वीकार्य नहीं होगी। अमेरिका में होने वाली पीस बोर्ड की बैठक और गाजा में हमास की मजबूत होती पकड़ के बीच अब संघर्ष का एक नया मोर्चा खुलता दिख रहा है।