ग्रीनलैंड की जनता ने ट्रंप को ललकारा, सड़को पर किया प्रदर्शन, लगे 'हम न अमेरिकी हैं, न कभी होंगे' के नारे

Greenland Protest Against Donald Trump: ग्रीनलैंड में अमेरिकी नियंत्रण के विरोध में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारी जोर देकर कह रहे हैं, “ग्रीनलैंड न बिकेगा, न अमेरिका का हिस्सा बनेगा।”
Greenland Protest Against Donald Trump
ग्रीनलैंड में डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ विरोध प्रदर्शन (सोर्स- सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Greenland Revolt against Trump: ग्रीनलैंड में इस समय तापमान दिन में 1-2 डिग्री और रात में माइनस 3-4 डिग्री तक गिर जाता है। सामान्यतः इतनी ठंड में लोग घरों में रहकर गर्मी का इंतजाम करते हैं, लेकिन इस बार हालात बदल गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की योजना ने देश में आग लगा दी है। शनिवार को हजारों लोग बर्फ से ढकी सड़कों पर उतर आए। यह प्रदर्शन अब तक का सबसे बड़ा और संगठित जनआंदोलन माना जा रहा है। ग्रीनलैंड के नागरिकों ने स्पष्ट रूप से विरोध किया कि अमेरिका के दबाव में वह अपने देश को बेचने या उसके हिस्से बनने की अनुमति नहीं देंगे। आमतौर पर शांत रहने वाला यह देश अब ग्लेशियर पिघलने और जलवायु परिवर्तन की खबरों के बजाय अमेरिकी दबाव के खिलाफ विद्रोह की आवाज़ बन गया है। प्रदर्शनकारियों ने एकजुट होकर कहा, “ग्रीनलैंड न बिकेगा और न ही अमेरिका का हिस्सा बनेगा।”

अमेरिका के सड़कों पर उतरे लोग

राजधानी नूक में यह दृश्य अभूतपूर्व था। लगभग 20 हजार की आबादी वाले इस शहर में एक चौथाई लोग सड़कों पर उतर आए। हाथों में राष्ट्रीय झंडे, पोस्टर और तख्तियां लिए प्रदर्शनकारी नारे लगा रहे थे  ‘ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है’। यह मार्च शहर के केंद्र से अमेरिकी वाणिज्य दूतावास तक गया, जिसे सुरक्षा कारणों से पुलिस ने सील कर दिया। इस तरह के प्रदर्शन ग्रीनलैंड के अन्य शहरों और डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन सहित यूरोप के कई शहरों में भी हुए।

प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन भी इस मार्च में शामिल हुए और बर्फीले टीले पर झंडा लहराया, जिसे देखकर भीड़ ने तालियां बजाईं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि ट्रंप के बार-बार बयान देने से उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ा। उन्होंने जोर देकर कहा, “हम बिकाऊ नहीं हैं। यह हमारी आवाज है और हम चुप नहीं रहेंगे।” ग्रीनलैंड का संदेश साफ है “हम न अमेरिका के थे, न कभी होंगे।”

ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर लगाया टैरिफ

प्रदर्शन के दौरान अमेरिका से खबर आई कि डोनाल्ड ट्रंप ने डेनमार्क और कुछ यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ लगाने का ऐलान किया, जो ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे का विरोध कर रहे थे। इससे प्रदर्शनकारियों का गुस्सा बढ़ गया, लेकिन कई लोगों ने कहा कि आजादी और आत्मनिर्णय आर्थिक नुकसान से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। इस विवाद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया, और फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन तथा नॉर्वे ने वहां सैन्य तैनाती की घोषणा की। डेनमार्क ने इसे आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत करने के कदम के रूप में बताया।

ट्रंप का कहना है कि ग्रीनलैंड राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है, और अगर अमेरिका ने नियंत्रण नहीं किया तो चीन या रूस वहां अपना प्रभाव बढ़ा सकते हैं। रूस ने इसे मजाक बनाया, लेकिन व्हाइट हाउस ने स्पष्ट कर दिया कि ट्रंप इस लक्ष्य से पीछे नहीं हटेंगे और जून तक किसी सहमति न होने पर टैरिफ 25% बढ़ा दिए जाएंगे।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com