परमाणु कार्यक्रम नहीं छोड़ा तो… फ्रांस ने ईरान को दी कड़ी चेतावनी, तेहरान ने भी दी पलटवार की धमकी
France Stiffens Stance On Iran: फ्रांस ने साफ कर दिया है कि जब तक ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक उस पर लगे प्रतिबंध नहीं हटाए जाएंगे।
- Written By: अमन उपाध्याय
फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो, फोटो (सो.सोशल मीडिया)
France Stiffens Stance On Iran Nuclear Program: ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर तनाव एक बार फिर गहरा गया है। फ्रांस ने इस मुद्दे पर अपना रुख अत्यंत सख्त कर लिया है। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने घोषणा की है कि ईरान द्वारा अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से छोड़ने की घोषणा किए बिना उस पर लगे प्रतिबंधों में किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी जाएगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में शांति समझौतों को लेकर कूटनीतिक प्रयास तेज हो रहे हैं।
फ्रांस ने ईरान के सामने रखी कड़ी शर्तें
फ्रांस ने साफ किया है कि प्रतिबंध हटाने का तब तक कोई सवाल ही नहीं उठता जब तक तेहरान अपने परमाणु महत्वाकांक्षाओं का त्याग नहीं कर देता। फ्रांस के विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि पेरिस परमाणु वार्ता में सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है।
गौरतलब है कि फ्रांस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है और उसके पास वीटो का अधिकार भी है, जिसका अर्थ है कि फ्रांस की सहमति के बिना संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को हटाना संभव नहीं होगा। बारो ने स्पष्ट किया कि जब तक वे अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच किसी भी संभावित समझौते की शर्तों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं होते, वे प्रतिबंध हटाने का समर्थन नहीं करेंगे।
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ईरान ने अमेरिका को दी पलटवार की चेतावनी
तेहरान ने फ्रांस के इन बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि ईरान ने हमेशा हर वार्ता में गंभीरता और पूरी जिम्मेदारी के साथ हिस्सा लिया है। उन्होंने आगे कहा कि ईरान ने कभी भी सबसे पहले अपने वादों का उल्लंघन नहीं किया है और हमेशा सद्भावना के साथ अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा किया है।
बाघेई ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अमेरिका युद्ध समाप्त करने संबंधी अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं करता है, तो ईरान भी अमेरिका के साथ हुए समझौता ज्ञापन (MoU) का पालन करना बंद कर देगा। रुख बाघेई ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को याद दिलाया कि ईरान का रुख हमेशा बराबरी का रहा है। उन्होंने कहा कि जब भी दूसरे पक्ष ने अपने दायित्वों को पूरा नहीं किया, हमने भी अपने दायित्वों का पालन नहीं किया।
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इसके अलावा, उन्होंने एक महत्वपूर्ण सिद्धांत को बताते हुए कहा कि दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत के मामले में न्याय सुनिश्चित करना ईरानी सरकार का एक मूलभूत सिद्धांत और जिम्मेदारी है, जिसमें विदेश मंत्रालय भी सक्रिय रूप से शामिल है। वर्तमान कूटनीतिक गतिरोध यह दर्शाता है कि जब तक दोनों पक्ष अपनी शर्तों पर लचीला रुख नहीं अपनाते, तब तक परमाणु समझौते पर सहमति बनना मुश्किल बना रहेगा।
