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UNSC Election: जर्मनी की हार से भारत की स्थायी सीट पर बढ़ा खतरा, G4 समूह बन रहा है बड़ी चुनौती
- Written By: प्रिया सिंह
UNSC Election Defeat: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद चुनाव में जर्मनी की अप्रत्याशित हार से भारत की स्थायी सीट की उम्मीदों को भारी झटका लगा है। भारत के लिए यह नतीजे एक बहुत बड़ी चेतावनी हैं।

जर्मनी की हार से भारत की स्थायी सीट पर बढ़ा खतरा (सोर्स-सोशल मीडिया)
Upcoming UNSC Election Impact: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थाई सीट के लिए हुए हालिया चुनाव में जर्मनी को भारी हार का सामना करना पड़ा है। इस हार ने भारत को भी पूरी तरह से अलर्ट मोड में ला दिया है और चिंताएं बढ़ा दी हैं। यूरोप कोटे की दो अहम सीटों के लिए हुए कड़े मुकाबले में जर्मनी अपनी जगह बनाने में पूरी तरह विफल रहा। उसे इस बेहद महत्वपूर्ण चुनाव में पुर्तगाल और ऑस्ट्रिया के हाथों अप्रत्याशित रूप से करारी हार का मुंह देखना पड़ा है।
जर्मनी की यह अप्रत्याशित हार भारत के लिए भी कूटनीतिक रूप से एक बहुत बड़ा झटका मानी जा रही है। जून में हुए इस अहम चुनाव में पुर्तगाल को 134 और ऑस्ट्रिया को 131 वोट हासिल हुए, जबकि जर्मनी पीछे रहा। वहीं जर्मनी को सिर्फ 104 वोटों से ही संतोष करना पड़ा, जो उसकी कमजोर होती वैश्विक स्थिति को साफ दर्शाता है। पूर्व राजनयिक टीएस तिरुमूर्ति ने इस बड़ी हार की मुख्य वजह इजरायल का अंधा समर्थन और चीन-रूस का कड़ा विरोध बताया है।
भारत के लिए बड़ी चेतावनी
जर्मनी की यह हार भारत के लिए एक बहुत बड़ी और गंभीर चेतावनी के रूप में सामने आई है। भारत साल 2028-2029 के अस्थाई कार्यकाल के लिए पूरी मजबूती से चुनाव लड़ रहा है। इसके लिए जून 2027 में अहम वोटिंग होनी है, जिसमें भारत का कजाकिस्तान से सीधा मुकाबला है। इसलिए भारत को अब अपनी रणनीति पर फिर से बहुत ही गंभीरता से विचार करने की तत्काल जरूरत है।
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G4 समूह की चुनौतियां
जर्मनी उस शक्तिशाली G4 समूह का सदस्य है जिसमें भारत, जापान और ब्राजील भी मुख्य रूप से शामिल हैं। यह विशेष समूह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीटों के बड़े विस्तार की लगातार मांग कर रहा है। लेकिन इस समूह में शामिल हर देश का कोई न कोई बड़ा विरोधी मौजूद है जो उनका रास्ता रोकता है। जैसे भारत का विरोध पाकिस्तान, ब्राजील का मेक्सिको, जर्मनी का इटली और जापान का विरोध दक्षिण कोरिया हमेशा करता है।
क्या G4 बन रहा है फांस?
पूर्व राजनयिक टीएस तिरुमूर्ति का कहना है कि भारत एक तरफ अपने सहयोगी देशों और दूसरी तरफ विरोधियों के बीच फंसा है। उन्होंने यह अहम सवाल उठाया है कि क्या G4 सदस्यता भारत के लिए गले की फांस बन गई है। चीन और रूस जैसे स्थायी सदस्य भी परिषद में किसी भी बड़े सुधार के हमेशा से सख्त खिलाफ रहे हैं। ऐसे में भारत को वैश्विक स्तर पर अपने समर्थन को लेकर और भी ज्यादा सतर्क रहने की बहुत आवश्यकता है।
बदलते वैश्विक समीकरण
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद आज भी 90 साल पुराने द्वितीय विश्वयुद्ध के पुराने वर्ल्ड ऑर्डर को ही पूरी तरह दर्शाती है। आज के समय में दुनिया का शक्ति संतुलन और राजनीतिक समीकरण काफी हद तक बदल चुके हैं। अब यह तेजी से महसूस किया जा रहा है कि संयुक्त राष्ट्र को फिर से मजबूत करने का एकमात्र तरीका सुधार है। भारत को ग्लोबल साउथ से भारी समर्थन मिला है और सुधार होने पर उसका शामिल होना तय माना जाता है।
यह भी पढ़ें: भारत-ऑस्ट्रेलिया का बड़ा कदम, PACTS से साइबर सिक्योरिटी, AI और सप्लाई चेन में बढ़ेगा सहयोग
ग्लोबल साउथ का मजबूत समर्थन
संयुक्त राष्ट्र में चुने जाने के लिए भारत हमेशा से ग्लोबल साउथ के भारी समर्थन पर ही निर्भर रहा है। साल 2017 में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के चुनाव में भी भारत को बहुत बड़ी ऐतिहासिक जीत मिली थी। उस वक्त जस्टिस दलवीर भंडारी को पांच स्थायी सदस्यों के कड़े विरोध के बावजूद भारी बहुमत से चुना गया था। तब पांचों स्थायी सदस्यों ने एक ब्रिटिश उम्मीदवार का पूरा समर्थन किया था, फिर भी भारत की बड़ी जीत हुई थी।
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