- Hindi News »
- World »
- Explainer Iran Israel Missile Drone Attack Blast Site Impact Technology Warfare
Explainer: सिर्फ आग और धुआं नहीं, मिसाइल हमले के पीछे काम करता है ये जटिल सिस्टम, जानें कैसे मचती है तबाही
US-Iran War: मिसाइल और ड्रोन हमले के बाद 'ब्लास्ट साइट' पर क्या होता है? जानिए वारहेड की ताकत, मलबे में बचाव अभियान और ईरान की उस मिसाइल तकनीक के पीछे का विज्ञान जिसने इजरायल को दहला दिया।
- Written By: अक्षय साहू

सांकेतिक तस्वीर
US-Iran War: ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया का ध्यान फिर से इस क्षेत्र की ओर खींचा है। इस संघर्ष में मिसाइल और ड्रोन हमलों का इस्तेमाल सबसे ज्यादा देखने को मिला है। आमतौर पर जब हम युद्ध के मैदान में मिसाइल या बम की चर्चा सुनते हैं, तो हमारे दिमाग में सिर्फ धमाका, आग और धुआं आता है। लेकिन असलियत इससे कहीं ज्यादा जटिल और भयानक होती है। आइए आज हम आपको बताते हैं कि मिसाइल और ड्रोन के बाद ब्लास्ट साइट पर क्या-क्या होता है।
जब कोई मिसाइल, ड्रोन या बम अपने लक्ष्य को हिट करता है, तो ब्लास्ट साइट यानी धमाके की जगह पर सिर्फ आवाज और चमक ही नहीं होती। जमीन पर बड़े गड्ढे बन जाते हैं, कभी-कभी ये छह फीट गहरे और 25 से 30 फीट चौड़े भी हो सकते हैं। इमारतों के कई हिस्से पूरी तरह ध्वस्त हो जाते हैं, दीवारें गिर जाती हैं और बड़े मलबे का ढेर बन जाता है। पेड़ उलट जाते हैं और उनके जड़ें बाहर आ जाती हैं। आसपास के इलाके में भूंकप जैसी तरंगें पैदा होती हैं, जिससे इमारतें हिलकर टूट जाती हैं। घर के अंदर रखी चीजें उछलकर बाहर चली जाती हैं और सड़कें पूरी तरह बिखर जाती हैं।
मिसाइल की ताकत में डिजाइन-वॉरहेड का अहम किरादार
एक मिसाइल या ड्रोन की तबाही उसकी डिजाइन और वॉरहेड की ताकत पर निर्भर करती है। मिसाइल के वॉरहेड तीन तरह के होते हैं। सबसे सामान्य होता है कन्वेंशनल वॉरहेड, जो सामान्य विस्फोटक होता है। दूसरा होता है फ्रैगमेंटेशन वॉरहेड, जो विस्फोट के साथ लक्ष्य के आसपास के क्षेत्र को नुकसान पहुँचाता है।
सम्बंधित ख़बरें
वियतनाम की धरती से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की पाकिस्तान को दो टूक, बोले- भारत नहीं सहेगा न्यूक्लियर ब्लैकमेल
PM Modi Visit: नॉर्डिक समिट के बाद इटली जाएंगे पीएम मोदी, पीएम जॉर्जिया मेलोनी के साथ होगी अहम वार्ता
इजरायल का बड़ा एक्शन: गाजा सहायता बेड़े को समुद्र में रोका, दक्षिण कोरिया के एक्टिविस्ट को लिया हिरासत में
रूस ने चीन के जहाज पर किया हमला, यूक्रेन ने किया दावा, पुतिन के बीजिंग जाने से पहले दोस्ती में पड़ी दरार!
तीसरा और सबसे खतरनाक होता है पेनीट्रेटर वॉरहेड, जो मजबूत इमारतों और ठोस संरचनाओं में घुसकर फटता है। मिसाइल की सटीकता और दिशा तय करने में उसके गाइडेंस सिस्टम और GPS का बड़ा रोल होता है। प्रोपल्शन सिस्टम, जो सॉलिड या लिक्विड फ्यूल से चलता है, मिसाइल को उड़ान और थ्रस्ट देता है।
मलबे में फंसे लोगों को ढूंढता है डॉग स्क्वॉड
युद्ध के दौरान मिसाइल या ड्रोन हमले के बाद राहत और बचाव की प्रक्रिया तुरंत शुरू हो जाती है। घटनास्थल पर रेड क्रिसेंट जैसी संगठन की टीमें पहुंचती हैं। इनके साथ डॉग स्क्वॉड, फायर फाइटर और डॉक्टर भी मौजूद होते हैं। डॉग स्क्वॉड मलबे में फंसे लोगों को ढूंढने का काम करता है, जबकि डॉक्टर घायल लोगों का तुरंत इलाज करते हैं। फायर फाइटर आग बुझाने में मदद करते हैं। बड़े मलबे को हटाने के लिए बुल्डोजर और भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में हर किसी का काम सिस्टम के तहत तय होता है, ताकि अधिक से अधिक जानें बचाई जा सकें।
चीन-रूस की मदद से ईरान ने बनाई खतरनाक मिसाइल
ईरान की मिसाइल तकनीक भी काफी चर्चा में है। दावा किया जाता है कि इसमें चीन और रूस की तकनीकी मदद शामिल है और नॉर्थ कोरिया भी इसमें सपोर्ट करता है। ईरान के पास अपनी मिसाइल प्रोग्राम को चलाने के लिए पेट्रोलियम से कमाई का इस्तेमाल किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद ईरान ने अपने मिसाइल और ड्रोन प्रोग्राम को लगातार विकसित किया है।
ईरानी हमले कंक्रीट की इमारतें चकनाचूर
हाल ही में, 28 मार्च 2026 को ईरान ने इजरायल के बेत शेमेष पर मिसाइल हमला किया। इस हमले में धमाका इतना भयानक था कि कंक्रीट की इमारतें ग्राइंडर में पीसी हुई जैसी लग रही थीं। पेड़ उलट गए और सड़कें पूरी तरह टूट गईं। हमले में इस्तेमाल हुई मिसाइलें कई वारहेड वाली और ज्यादा विस्फोटक क्षमता वाली थीं। इजरायल का एयर डिफेंस सिस्टम इस हमले को रोकने में असफल रहा। अमेरिकी सैनिक बेसमेंट में छिप गए थे, लेकिन मिसाइलें बिना रुके शहर में घुस गईं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने मिसाइलों के जरिए अपनी ताकत दिखाने और अंतरराष्ट्रीय शक्तियों की मनमानी पर रोक लगाने की कोशिश की है। यह युद्ध केवल भौतिक तबाही तक सीमित नहीं है; इसका असर सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी दिखाई देता है। युद्ध के दौरान, ब्लास्ट साइट की जांच बहुत गंभीरता से होती है। विशेषज्ञ गड्ढों, मलबे और इमारतों के टूटने के पैटर्न से यह समझने की कोशिश करते हैं कि किस प्रकार की मिसाइल या बम इस्तेमाल हुआ।
वैश्विक तकनीकी साझेदारी का परिणाम
मिसाइल और ड्रोन तकनीक पूरी दुनिया में जुड़ी हुई है। अलग-अलग देशों का तकनीकी और वित्तीय सहयोग मिलकर इसे संभव बनाता है। चीन और रूस की तकनीक, नॉर्थ कोरिया की मदद, और ईरान की अपनी इंजीनियरिंग इस जटिल नेटवर्क का हिस्सा हैं। इसके अलावा, युद्ध में इस्तेमाल होने वाले हथियारों की मारक क्षमता और दिशा तय करने वाले सिस्टम एक तरह से वैश्विक तकनीकी साझेदारी का परिणाम भी हैं।
युद्ध एक भयानक त्रासदी है, लेकिन इसके पीछे भी सिस्टम और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर काम करते हैं। मिसाइल, ड्रोन और बम हमलों के लिए वैज्ञानिक, इंजीनियर, सेना और राहत टीम सभी का रोल तय होता है। हर घटना के बाद राहत, जांच और पुनर्निर्माण का काम शुरू होता है। यही कारण है कि युद्ध में भी, इस भयानक स्थिति के बीच, एक निश्चित सिस्टम और प्रक्रिया मौजूद रहती है।
यह भी पढ़ें- ईरान पर हमला टाल सकते हैं ट्रंप! अल्टीमेटम खत्म होने से पहले आएगी खुशखबरी? जेडी वेंस ने जगाई उम्मीद
आधुनिक युद्ध की बदली तस्वीर
ईरान-इजरायल टकराव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक युद्ध सिर्फ सैनिकों और हथियारों की लड़ाई नहीं है। इसमें तकनीक, रणनीति, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मानवीय राहत सभी का महत्वपूर्ण योगदान होता है। मिसाइलों और ड्रोन हमलों की भयानक ताकत को समझना और इसके पीछे की प्रक्रिया को जानना आज की दुनिया में जरूरी हो गया है।
Explainer iran israel missile drone attack blast site impact technology warfare
Get Latest Hindi News , Maharashtra News , Entertainment News , Election News , Business News , Tech , Auto , Career and Religion News only on Navbharatlive.com
लेटेस्ट न्यूज़
जंगल में जहां मशीनें हार मान जाती हैं, वहां हाथी बनता है असली हीरो! वायरल वीडियो ने जीता दिल
May 19, 2026 | 06:56 PMNEET Paper Leak का केंद्र बना महाराष्ट्र, नागपुर-चंद्रपुर में भी CBI की छापेमारी, अब तक 10 गिरफ्तार
May 19, 2026 | 06:47 PMGanga Dussehra 2026: 25 मई को है गंगा दशहरा, इस दुर्लभ संयोग में दान की ये चीजें खोलेंगी बंद किस्मत के ताले
May 19, 2026 | 06:42 PMसागर के मंदिर में खुदाई के दौरान निकला खजाना, मिले चांदी के सिक्के; 100 साल से ज्यादा पहले किए गए थे दफन
May 19, 2026 | 06:39 PMMP Anganwadi co-location: एक परिसर में लगेंगे आंगवाड़ी और स्कूल ,छोटे बच्चों की झिझक को खत्म करने का प्रयास
May 19, 2026 | 06:38 PMसिर्फ 100 रुपये बचाने के चक्कर में पड़ सकता है 10,000 का भारी चालान, गाड़ी चलाते हैं तो तुरंत चेक करें ये कागज
May 19, 2026 | 06:38 PMHoliday Activity: छुट्टियों में बोर हो रहें बच्चे, तो उनके साथ करें ये मजेदार एक्टिविटी; दूर होगी बोरियत
May 19, 2026 | 06:33 PMवीडियो गैलरी

पहले पहचान छुपाता था UP का युवा, अब…CM योगी ने विपक्ष पर कसा तंज, सरकारी भर्तियों पर दिया बड़ा बयान- VIDEO
May 19, 2026 | 02:43 PM
MP पुलिस पर रिश्वत मांगने का आरोप,…कहां से लाऊं ₹50,000? रोती महिला का VIDEO वायरल
May 19, 2026 | 02:24 PM
आगे ऑटो में विधायक, पीछे फॉर्च्यूनर से शूटिंग! PM मोदी की अपील का ऐसा असर देख चकराए लोग- VIDEO
May 18, 2026 | 02:14 PM
रास्ता ब्लॉक करके नमाज अदा करना…हुमायूं कबीर का बड़ा बयान, वंदे मातरम को बताया भारतीय संस्कृति का हिस्सा
May 18, 2026 | 02:00 PM
ऐसे जाहिल गंवारों को…NEET पेपर लीक पर बुरी तरह भड़के विशाल ददलानी, बोले- सत्ता में बैठे लोग खुद शिक्षित नहीं
May 18, 2026 | 01:38 PM
केरलम: वीडी सतीशन ने ली CM पद की शपथ, खरगे-राहुल-प्रियंका-रेवंत रेड्डी समेत कई दिग्गज नेता रहे मौजूद- VIDEO
May 18, 2026 | 11:54 AM














