मैक्रों मोदी मीटिंग, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
PM Modi Macron AI Photo: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इन दिनों भारत के तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर हैं। इस यात्रा के दौरान जहां रक्षा और तकनीक जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा हो रही है, वहीं एक ऐसी तस्वीर ने सबका ध्यान खींचा है जिसने सोशल मीडिया पर धूम मचा दी है।
राष्ट्रपति मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा बनाई गई तस्वीर साझा की है जिसमें दोनों नेता मुस्कुराते हुए अपने हाथों से ‘दिल’ का साइन बनाते नजर आ रहे हैं।
मैक्रों ने इस तस्वीर को अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट करते हुए लिखा कि जब दोस्त मिलते हैं, तो इनोवेशन होता है। मैं AI इम्पैक्ट समिट के लिए तैयार हूं! इस तस्वीर की सबसे खास बात यह है कि इसके नीचे स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि यह एक AI जनित तस्वीर है। यह फोटो ऐसे समय में आई है जब दोनों देश नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ‘AI इम्पैक्ट समिट’ में हिस्सा लेने जा रहे हैं जहां भविष्य की तकनीक और सहयोग पर रणनीति बनाई जाएगी।
When friends connect, innovation follows. Ready for The AI Impact Summit! pic.twitter.com/oh4700pQ09 — Emmanuel Macron (@EmmanuelMacron) February 18, 2026
मैक्रों की इस यात्रा के दौरान मुंबई में दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई। इसमें रक्षा, व्यापार, अंतरिक्ष, ऊर्जा और इनोवेशन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी घोषणा करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि भारत और फ्रांस मिलकर दुनिया का पहला ऐसा हेलीकॉप्टर (H-125) बनाएंगे जो माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई तक उड़ सकेगा। इसकी असेंबली लाइन भारत में ‘Airbus’ और ‘Tata’ की साझेदारी में शुरू की गई है।
दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मैक्रों ने स्वीकार किया कि वैश्विक AI रेस में भारत और फ्रांस फिलहाल अमेरिका और चीन से पीछे हो सकते हैं लेकिन वे मजबूती से मुकाबला कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस रेस में बने रहने के लिए तीन चीजें सबसे अहम हैं: कंप्यूटिंग कैपेसिटी, टैलेंट और पूंजी ।
आंकड़ों के मुताबिक, भारत के रक्षा आयात में रूस की हिस्सेदारी जो कभी 70-80% थी, वह अब घटकर 36% रह गई है, जबकि फ्रांस 33% के साथ दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। जानकारों का मानना है कि राफेल जैसे बड़े सौदों के बाद फ्रांस जल्द ही भारत का सबसे बड़ा रक्षा साझेदार बन सकता है।