पाकिस्तान में मचेगा हाहाकार! शाहपुर कंडी बांध बनकर तैयार, अब बूंद-बूंद पानी को तरसेगा पड़ोसी मुल्क-VIDEO
Shahpurkandi Dam: भारत और पाकिस्तान के बीच जल कूटनीति के एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। भारत सरकार आगामी 31 मार्च 2026 तक शाहपुर कंडी बांध परियोजना को पूरा करने की तैयारी में है।
- Written By: मनोज आर्या
Shahpurkandi Dam Project Completion 2026: भारत और पाकिस्तान के बीच जल कूटनीति के एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। भारत सरकार आगामी 31 मार्च 2026 तक शाहपुर कंडी बांध परियोजना को पूरा करने की तैयारी में है, जिसके बाद रावी नदी का वह अतिरिक्त पानी पाकिस्तान जाना बंद हो जाएगा जो दशकों से बिना किसी नियंत्रण के बह रहा था। पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर स्थित यह महत्वाकांक्षी बांध रावी नदी पर बनाया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जैसे सूखाग्रस्त जिलों के साथ-साथ पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में लगभग 37,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करना है। सिंधु जल संधि (1960) के तहत रावी, ब्यास और सतलुज नदियों पर भारत का पूर्ण अधिकार है, फिर भी पर्याप्त भंडारण की कमी के चलते पाकिस्तान को इसका अप्रत्यक्ष लाभ मिलता रहा था। अब इस बांध के चालू होने से पाकिस्तान में जल संकट गहरा सकता है, जिससे वहां की कृषि और खाद्य सुरक्षा पर सीधा असर पड़ेगा। 1982 में शुरू हुई यह परियोजना करीब 46 साल बाद पूरी हो रही है, जो भारत की नई और सख्त जल नीति का प्रतीक है।
Shahpurkandi Dam Project Completion 2026: भारत और पाकिस्तान के बीच जल कूटनीति के एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। भारत सरकार आगामी 31 मार्च 2026 तक शाहपुर कंडी बांध परियोजना को पूरा करने की तैयारी में है, जिसके बाद रावी नदी का वह अतिरिक्त पानी पाकिस्तान जाना बंद हो जाएगा जो दशकों से बिना किसी नियंत्रण के बह रहा था। पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर स्थित यह महत्वाकांक्षी बांध रावी नदी पर बनाया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जैसे सूखाग्रस्त जिलों के साथ-साथ पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में लगभग 37,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करना है। सिंधु जल संधि (1960) के तहत रावी, ब्यास और सतलुज नदियों पर भारत का पूर्ण अधिकार है, फिर भी पर्याप्त भंडारण की कमी के चलते पाकिस्तान को इसका अप्रत्यक्ष लाभ मिलता रहा था। अब इस बांध के चालू होने से पाकिस्तान में जल संकट गहरा सकता है, जिससे वहां की कृषि और खाद्य सुरक्षा पर सीधा असर पड़ेगा। 1982 में शुरू हुई यह परियोजना करीब 46 साल बाद पूरी हो रही है, जो भारत की नई और सख्त जल नीति का प्रतीक है।
