अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (सोर्स-सोशल मीडिया)
Donald Trump Warns Keir Starmer: मिडिल-ईस्ट में जारी भीषण तनाव और युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सबसे पुराने सहयोगी ब्रिटेन को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के प्रति अपनी गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उनका मानना है कि जो ब्रिटेन कभी अमेरिका का सबसे महान सहयोगी हुआ करता था, अब उसे साथ रखने की कोई सैन्य या रणनीतिक आवश्यकता नहीं बची है। यह पूरा विवाद ब्रिटेन द्वारा मिडिल-ईस्ट में अपने दो विमानवाहक पोत तैनात करने के फैसले के बाद शुरू हुआ है जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में खलबली मचा दी है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी पोस्ट में ब्रिटेन को अपना बहुत ही पुराना और महान सहयोगी बताया, लेकिन साथ ही यह भी कह दिया कि अब उनकी कोई जरूरत नहीं है। वे इस बात से स्पष्ट रूप से नाराज दिखे कि ब्रिटेन उस वक्त युद्ध में शामिल होने की सोच रहा है जब जीत पहले ही लगभग हासिल की जा चुकी है। यह कड़ा बयान दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में समय और स्थिति के साथ पुराने भरोसेमंद रिश्तों की अहमियत भी कितनी जल्दी और नाटकीय रूप से बदल सकती है।
ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर को यह याद रखना चाहिए कि अमेरिका अब अकेले ही दुनिया की बड़ी चुनौतियों से निपटने में सक्षम है। उनका मानना है कि जब युद्ध अपने अंतिम पड़ाव पर हो, तब किसी देश का सहायता के लिए आगे आना केवल एक राजनैतिक दिखावा और औपचारिकता मात्र है। इस तीखे संदेश ने लंदन से लेकर वाशिंगटन तक हड़कंप मचा दिया है क्योंकि किसी ने भी ट्रंप से अपने सबसे करीबी सहयोगी के प्रति ऐसी भाषा की उम्मीद नहीं की थी।
प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने हाल ही में घोषणा की थी कि ब्रिटेन मिडिल-ईस्ट के अशांत क्षेत्र में अपने दो विशाल विमानवाहक पोत और युद्धपोत भेजने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। साइप्रस में स्थित ब्रिटिश सैन्य ठिकानों पर हुए हालिया ड्रोन हमलों के बाद ब्रिटेन ने अपनी सुरक्षा को पुख्ता करने के उद्देश्य से सैन्य मौजूदगी बढ़ाने का यह फैसला लिया था। लेकिन ट्रंप को ब्रिटेन का यह देर से उठाया गया कदम कतई रास नहीं आया और उन्होंने इसे गैर-जरूरी बताते हुए सार्वजनिक रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
ट्रंप ने तंज कसते हुए अपनी पोस्ट में लिखा कि उन्हें अब उन लोगों की बिल्कुल जरूरत नहीं है जो युद्ध जीतने के बाद उसमें अपनी भागीदारी दिखाने की कोशिश करते हैं। ब्रिटेन का यह निर्णय संभवतः क्षेत्र में अपने गिरते प्रभाव को बचाने की एक कोशिश है, लेकिन ट्रंप ने इसे एक कमजोर और अवसरवादी कदम के रूप में पेश किया है। इस विवाद ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में अमेरिका और ब्रिटेन के बीच सैन्य तालमेल को लेकर राह अब उतनी आसान नहीं रहने वाली है जितनी पहले थी।
बता दें कि मिडिल-ईस्ट की जंग की आग अब धीरे-धीरे अन्य क्षेत्रों में भी फैल रही है जिससे साइप्रस में मौजूद ब्रिटेन के रणनीतिक ठिकाने भी असुरक्षित हो गए हैं। कीर स्टार्मर ने साइप्रस के राष्ट्रपति को आश्वासन दिया था कि वे ड्रोन रोधी क्षमता वाले हेलीकॉप्टर और आधुनिक युद्धपोत एचएमएस ड्रैगन को क्षेत्र में तुरंत तैनात कर रहे हैं। ब्रिटेन का तर्क है कि वह अपने ठिकानों और वहां तैनात सैनिकों की रक्षा के लिए यह कदम उठा रहा है, परंतु ट्रंप की नजर में यह रणनीतिक रूप से बेकार है।
ब्रिटेन के लिए अपने सैनिकों की जान बचाना और क्षेत्रीय शांति बनाए रखना इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता है, जिसके लिए वे हर संभव सैन्य साधन जुटा रहे हैं। लेकिन ट्रंप ने जिस तरह ‘हमें अब उनकी जरूरत नहीं है’ कहा, उसने ब्रिटेन की सैन्य साख और उसकी अंतरराष्ट्रीय भूमिका पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। जंग के इस दौर में सहयोगी देशों के बीच ऐसी तल्खी युद्ध की दिशा और अंतरराष्ट्रीय समीकरणों को पूरी तरह से बदल कर रख सकती है जो चिंताजनक है।
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ट्रंप की इस खुली धमकी ने अमेरिका और ब्रिटेन के दशकों पुराने ‘स्पेशल रिलेशनशिप’ को अब एक बेहद नाजुक और अनिश्चित मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। उन्होंने अपनी पोस्ट के अंत में यह भी स्पष्ट चेतावनी दी कि ‘हम याद रखेंगे’, जो भविष्य के द्विपक्षीय व्यापार और रक्षा समझौतों के लिए खतरे की घंटी हो सकता है। यह बयान न केवल एक व्यक्तिगत नाराजगी है, बल्कि यह बदलती वैश्विक व्यवस्था में अमेरिका के ‘अकेले चलो’ वाली नीति की ओर भी इशारा करता है।
अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ट्रंप की इस तीखी और अपमानजनक टिप्पणी का कूटनीतिक रूप से क्या जवाब देते हैं। ब्रिटिश सरकार के लिए यह एक कठिन परीक्षा की घड़ी है जहां उसे अपनी संप्रभुता और अमेरिका के साथ अपने पुराने संबंधों के बीच एक संतुलन बनाना होगा। युद्ध की इस आग के बीच सहयोगियों का इस तरह बिखरना मिडिल-ईस्ट में शांति की कोशिशों को और अधिक जटिल और चुनौतीपूर्ण बना सकता है।