‘फूटी कौड़ी भी नहीं दूंगा…’ पूरी तरह से खत्म हो चुका है ईरान, मोजतबा खामेनेई के दावे पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप
Trump On US Iran Peace Deal: ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के 'बेताबी' वाले दावे पर पलटवार करते हुए कहा है कि ईरान की सैन्य शक्ति खत्म हो चुकी है और उसे अब कोई वित्तीय मदद नहीं मिलेगा।
- Written By: अमन उपाध्याय
डोनाल्ड ट्रंप, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
US Iran Peace Deal No Funds:अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के बीच जुबानी जंग एक बार फिर तेज हो गई है। ट्रंप ने मोजतबा खामेनेई के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि अमेरिकी नेता इस समझौते को सुरक्षित करने के लिए ‘बेताब’ थे।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि अब ईरान को अमेरिका से ‘फूटी कौड़ी’ भी नहीं मिलने वाली है। अमेरिका भविष्य में ईरान को कोई भी वित्तीय राहत देने के पक्ष में नहीं है।
सैन्य ताकत को लेकर ट्रंप के बड़े दावे
ट्रंप ने न केवल आर्थिक बल्कि सामरिक मोर्चे पर भी ईरान को घेरा। उन्होंने दावा किया कि हालिया संघर्षों ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह तबाह कर दिया है। ट्रंप के अनुसार, अब ईरान के पास प्रभावी रूप से कोई वायुसेना या नौसेना नहीं बची है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के पास अब एंटी-एयरक्राफ्ट इक्विपमेंट, रडार या व्यावहारिक रूप से युद्ध लड़ने के लिए कुछ भी महत्वपूर्ण शेष नहीं है। अब वे पूरी तरह से खत्म हो चुके हैं।
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डेमोक्रेट्स पर साधा निशाना
अपने संबोधन में डोनाल्ड ट्रंप ने अपने घरेलू राजनीतिक विरोधियों यानी डेमोक्रेट्स को भी निशाने पर लिया। उन्होंने इस बात का मजाक उड़ाया कि कुछ लोग अब भी यह दावा कर रहे हैं कि ईरान पहले की तुलना में मजबूत हुआ है। ट्रंप ने सवाल किया, ‘डेमोक्रेट्स कहते हैं कि ईरान अब चार महीने पहले की तुलना में बेहतर स्थिति में है। क्या आप इसकी कल्पना कर सकते हैं? कुछ लोग कितने मूर्ख हो सकते हैं?’।
मोजतबा खामेनेई का वह बयान जिससे भड़का विवाद
विवाद की शुरुआत तब हुई जब ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने दावा किया कि डोनाल्ड ट्रंप समझौते के लिए इतने बेताब थे कि उन्होंने इसे हासिल करने के लिए ‘सभी प्रकार की पैंतरेबाजी’ का इस्तेमाल किया। मोजतबा ने ईरानी जनता को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने शुरू में ‘सिद्धांत के तौर पर’ इस समझौते का विरोध किया था।
हालांकि, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सदस्यों से मिले आश्वासन के बाद उन्होंने इसे अपनी मंजूरी दी। उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि यह समझौता देश के हितों और ‘रेजिस्टेंस फ्रंट’ की रक्षा करेगा।
क्या है 14 सूत्रीय शांति समझौता?
बुधवार शाम को राष्ट्रपति ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से एक 14-पॉइंट मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य 28 फरवरी से अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी जंग को समाप्त करना है।
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इस डील के तहत दोनों देशों के बीच 60 दिनों तक सघन बातचीत चलने की उम्मीद है, ताकि परमाणु कार्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों पर किसी स्थायी समाधान तक पहुंचा जा सके। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। समझौते की प्रारंभिक शर्तों के अनुसार, ईरान Strait of Hormuz को तुरंत खोलेगा, जबकि अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटा लेगा।
