

US Iran Peace Deal MoU Signed: वैश्विक राजनीति के मंच से एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई महीनों से चला आ रहा खतरनाक सैन्य और कूटनीतिक संघर्ष आखिरकार खत्म हो गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने बुधवार को एक ऐतिहासिक 'मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिसे विश्व शांति की दिशा में एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।
इस समझौते का महत्वपूर्ण पल फ्रांस के पैलेस ऑफ वर्सेलिस में देखने को मिला। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वहां फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ डिनर पर मौजूद थे। इसी दौरान ट्रंप ने समझौते की हार्ड कॉपी पर अपने हस्ताक्षर किए और पत्रकारों के सामने गर्व से चिल्लाते हुए कहा 'It's signed'। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और इसकी डिजिटल प्रतियां तुरंत ईरान और मध्यस्थता कर रहे देशों को भेज दी गई हैं।
इस समझौते की सबसे अहम शर्त यह है कि अगले 60 दिनों तक दोनों देशों को पूर्ण संयम बरतना होगा। इस अवधि के दौरान अमेरिका और ईरान दोनों ही किसी भी ऐसे सैन्य, आर्थिक या राजनीतिक कदम से बचेंगे, जिससे आपसी विश्वास को ठेस पहुंचे या समझौते के क्रियान्वयन में बाधा आए। हालांकि, इस समझौते की नींव रविवार को ही रख दी गई थी, जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से इस पर हस्ताक्षर किए थे। अब शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में दोनों देशों के वार्ता दलों की एक और महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है, जहां इस ढांचे को एक स्थायी और पूर्ण समझौते में बदलने पर चर्चा होगी।
शांति के बदले ईरान ने अपनी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कड़े सौदे किए हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने स्पष्ट किया है कि तेहरान को अब बिना किसी परिवहन या बीमा संबंधी प्रतिबंध के अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना तेल बेचने की अनुमति मिलेगी।
इसके अलावा, अमेरिका ने ईरान की उन फ्रीज संपत्तियों तक उसकी पहुंच बहाल करने की प्रतिबद्धता जताई है, जो लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण रुकी हुई थीं। ईरान का लक्ष्य है कि तेल निर्यात से होने वाली आय सीधे उसके पास आए ताकि देश की आर्थिक स्थिति सुधर सके।
भले ही इस कूटनीतिक जीत का जश्न मनाया जा रहा हो, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने एक चेतावनी भी जारी की है। प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह समझौता अभी केवल एक 'प्रारंभिक ढांचा' है। दोनों ही पक्ष किसी भी समय इस समझौते से पीछे हट सकते हैं यदि शर्तों का उल्लंघन होता है। जिनेवा में होने वाली आगामी बातचीत यह तय करेगी कि क्या यह अल्पकालिक शांति एक दीर्घकालिक और अटूट संधि का रूप ले पाएगी।