Explainer: भारत में बैठकर बांग्लादेश में तख्तापलट करने की तैयारी में शेख हसीना! किस बात से डरी रहमान सरकार?
Sheikh Hasina Bangladesh: शेख हसीना की प्रस्तावित दिल्ली प्रेस कॉन्फ्रेंस और बांग्लादेश लौटने की चर्चा ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। जानिए सरकार क्यों चिंतित है और आगे क्या हो सकता है।
- Written By: अक्षय साहू
शेख हसीना की प्रेस कांफ्रेंस का बांग्लादेश सरकार कर रही विरोध (AI जनरेटेड इमेज)
Sheikh Hasina Delhi Media Event: 5 अगस्त 2024, आज से ठीक दो साल पहले बांग्लादेश में आरक्षण के मुद्दे को लेकर शुरू हुए छात्र आंदोलन के चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को अपना सब कुछ छोड़कर देश के भागना पड़ा था। वही शेख हसीना आज दो साल बाद भारत की राजधानी नई दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस करने जा रही है। इसे लेकर बांग्लादेश की वर्तमान तारिक रहमान सरकार परेशान है। रहमान सरकार ने भारत से अपील है कि हसीना के प्रेस कांफ्रेंस को रद्द किया जाए और उन्हें बोलने को रोका जाए।
2024 में सरकार गिरने के चलते शेख हसीना को मजबूरी में भारत में शरण लेना पड़ा था। इन दो सालों में शेख हसीना को सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आई हैं। हालांकि बीच-बीच में उनके इंटरव्यू बाहर आते रहे। हाल ही में उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में कहा कि वो वह 2026 के अंत तक अपने देश लौट जाएंगी। हसीना 5 अगस्त 2026 यानी आज अपनी सरकार गिरने की दूसरी बरसी पर एक ऑनलाइन प्रेस कांफ्रेंस करने जा रही है। इसे लेकर बांग्लादेश सरकार की चिंता बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि हसीना भारत में बैठकर देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सच में शेख हसीना ऐसा कर सकती हैं? बांग्लादेश लौटने पर उनके साथ क्या होगा? और रहमान सरकार हसीना की वापसी से परेशान क्यों है?
हसीना की वापसी से अवामी लीग जागी उम्मीद
शेख हसीना की वापसी की संभावना से उनकी पार्टी आवामी लीग में नई उम्मीद जगी है। पार्टी नेताओं का मानना है कि उनकी मौजूदगी से कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और संगठन फिर से मजबूत हो सकता है। पिछले दो वर्षों में पार्टी को लगातार राजनीतिक दबाव और संगठनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में हसीना की वापसी को पार्टी अपने लिए नए अवसर के रूप में देख रही है।
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प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर बढ़ा विवाद
भारत आने की दूसरी बरसी पर 5 अगस्त को दिल्ली में शेख हसीना की एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने की योजना बनाई गई है। इस कार्यक्रम को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ गया। बांग्लादेश सरकार ने भारत से अपील किया है कि इस कार्यक्रम को अनुमति न दी जाए। उसका आरोप है कि हसीना भारत की जमीन का इस्तेमाल कर बांग्लादेश की राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश कर रही हैं।
दिल्ली में आज प्रेस कांफ्रेंस करेंगी शेख हसीना (सोर्स- सोशल मीडिया)
हालांकि, भारत सरकार ने इस विवाद पर कहा कि प्रस्तावित कार्यक्रम किसी सरकारी संस्था का नहीं बल्कि एक निजी संगठन का आयोजन है। इसलिए सरकार का उससे सीधा संबंध नहीं है। साथ ही भारत ने यह भी साफ किया कि उसकी नीति किसी भी विदेशी नेता को अपनी जमीन से सक्रिय राजनीतिक गतिविधियां चलाने की अनुमति देने की नहीं है। सरकार ने मामले पर सतर्क नजर बनाए रखने की बात कही है।
कोर्ट ने सुनाई थी मौत की सजा
शेख हसीना के सामने सबसे बड़ी कानूनी चुनौती बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल द्वारा सुनाई गई मौत की सजा है। उन पर अगस्त 2024 की हिंसा और बड़ी संख्या में लोगों की मौत के मामले में दोषी ठहराए जाने का आरोप है। दिलचस्प बात यह है कि जिस ट्रिब्यूनल की स्थापना उनके शासनकाल में हुई थी, उसी ने अब उनके खिलाफ फैसला सुनाया है।
बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने हसीना को सुनाई थी मौत की सजा (सोर्स- सोशल मीडिया)
हालांकि ट्रिब्यूनल के फैसले के बावजूद शेख हसीना के पास अभी कानूनी विकल्प मौजूद हैं। वह बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दे सकती हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम फैसला आने से पहले अपील की पूरी प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है। इसलिए उनकी वापसी का फैसला काफी हद तक अदालत की आगे की कार्रवाई पर भी निर्भर करेगा।
शेख हसीना प्रत्यर्पित क्यों नहीं कर रहा भारत
बांग्लादेश की वर्तमान सरकार चाहती है कि भारत शेख हसीना को उसके हवाले करे। लेकिन भारत इस मामले के सभी कानूनी पहलुओं की जांच कर रहा है। संधि में यह प्रावधान भी है कि यदि मामला राजनीतिक अपराध की श्रेणी में आता है तो प्रत्यर्पण से इनकार किया जा सकता है।
शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर भारत की मुश्किलें AI जनरेटेड इमेज)
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत किसी भी फैसले से पहले यह देखेगा कि बांग्लादेश में शेख हसीना को निष्पक्ष सुनवाई मिल सकती है या नहीं। यदि अदालत की प्रक्रिया और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल बने रहते हैं तो भारत जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाएगा। इसी कारण प्रत्यर्पण का मुद्दा केवल कानूनी नहीं बल्कि कूटनीतिक दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।
बांग्लादेश की राजनीति में वापसी कर सकती हैं हसीना?
बांग्लादेश की मौजूदा राजनीति में शेख हसीना को लेकर अलग-अलग मत हैं। सरकार का कहना है कि पूरे मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। वहीं कुछ राजनीतिक दल और संगठन उनके खिलाफ कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इस मामले में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर बनी हुई है, इसलिए सरकार हर कदम सोच-समझकर उठा रही है।
यह भी पढ़ें- भागने से काम नहीं चलेगा! पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina को प्रत्यर्पित कराने के लिए बांग्लादेश का सख्त बयान
शेख हसीना की वापसी से सरकार परेशान क्यों?
दिसंबर 2026 तक बांग्लादेश लौटने का शेख हसीना का लक्ष्य कई कानूनी, राजनीतिक और कूटनीतिक चुनौतियों से घिरा हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार 2024 के बाद से बांग्लादेश में शेख हसीना की लोकप्रियता में कमी आई है, लेकिन तारिक रहमान सरकार की राय इससे उलट है। सरकार का मानना है कि भले ही हसीना की लोकप्रियता में कमी आई हो, लेकिन उन्होंने लंबे समय तक देश का प्रतिनिधित्व किया है। उनकी पार्टी पर सरकार ने कितना भी प्रतिबंध लगाया हो लेकिन एक बड़ा वर्ग अभी हसीना का समर्थक है। ऐसे में अगर वो स्वदेश लौटती हैं, तो उनके समर्थक देश में अशांति की स्थिति उत्पन्न कर सकते हैं। यही कारण है कि सरकार चाहती है कि जब तब भारत हसीना को प्रर्त्यपित नहीं करता, तब तक उनके बारे में कम से कम चीजें बाहर आए।
