
डोनाल्ड ट्रंप और मैडमैन थ्योरी (सोर्स-सोशल मीडिया)
Strategic Unpredictability In Leadership: आज के दौर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति चर्चा का विषय बनी हुई है। उनके कई बयान और फैसले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व में रणनीतिक अप्रत्याशितता पैदा कर रहे हैं। विशेषज्ञ इसे ‘मैडमैन थ्योरी’ से जोड़कर देख रहे हैं जहां नेता खुद को बेहद खतरनाक दिखाता है। इस आर्टिकल में इस रणनीति के इतिहास और ट्रंप के मौजूदा रुख का विश्लेषण करता है।
मैडमैन थ्योरी एक ऐसी रणनीति है जिसमें एक नेता जानबूझकर खुद को अप्रत्याशित और खतरनाक दिखाने की कोशिश करता है। इसका मुख्य उद्देश्य दुश्मन देशों को यह विश्वास दिलाना है कि वह किसी भी हद तक जा सकता है। इस डर के कारण सामने वाला पक्ष टकराव से पहले ही झुकने के लिए मजबूर हो जाता है।
इस थ्योरी का सबसे पहला प्रयोग अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने वियतनाम युद्ध के दौरान सफलतापूर्वक करने की कोशिश की थी। निक्सन ने खुद को इतना सख्त दिखाया कि दुश्मन को उनके परमाणु हमले तक का डर लगने लगा था। उन्होंने चाहा कि दुश्मन बिना लंबी लड़ाई के दबाव में आकर उनके साथ शांति समझौता कर ले।
डोनाल्ड ट्रंप के हालिया फैसलों को भी इसी थ्योरी के चश्मे से देखा जा रहा है क्योंकि उनके कदम काफी अप्रत्याशित हैं। वे कभी ग्रीनलैंड को खरीदने की जिद करते हैं तो कभी नाटो सहयोगियों के साथ एक बड़ा टैरिफ युद्ध छेड़ देते हैं। वाइट हाउस से जारी होने वाले उनके बयान अक्सर अंतरराष्ट्रीय स्थिरता को एक बड़ी चुनौती देते हैं।
ट्रंप की रणनीति में ईरान और ग्रीनलैंड जैसे मामलों में अन्य देशों को जंग या टैरिफ के जरिए डराना मुख्य रूप से शामिल है। वे अक्सर बहुत ही आक्रामक भाषा का इस्तेमाल करते हैं लेकिन कई बार बाद में अपने फैसलों से खुद पीछे भी हट जाते हैं। इससे दोस्त और दुश्मन देशों के बीच की बारीक लकीर अब पहले के मुकाबले काफी धुंधली होने लगी है।
निक्सन के दौर की तुलना में आज की दुनिया काफी बदल चुकी है और अब कूटनीतिक सूचनाएं दबाना लगभग असंभव हो गया है। आज सैटेलाइट, सोशल मीडिया और आधुनिक इंटेलिजेंस एजेंसियां हर बड़े नेता की अगली चाल को तुरंत ही भांप लेती हैं। इसलिए किसी भी नेता के लिए लंबे समय तक दूसरों को डराना अब बहुत मुश्किल काम है।
जब कोई नेता बार-बार धमकियां देकर पीछे हटता है, तो बाकी देश उसकी इस चाल को अच्छी तरह समझने लगते हैं। वियतनाम ने भी निक्सन की परमाणु धमकी को समझ लिया था और अंत में अमेरिका को ही वहां से सेना हटानी पड़ी थी। ट्रंप के मामले में भी ग्रीनलैंड और ईरान ने उनके व्यवहार के पैटर्न को अब पहचान लिया है।
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ट्रंप की इस नीति का असर नाटो जैसे पुराने और मजबूत सैन्य गठबंधनों पर भी अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। ग्रीनलैंड के मुद्दे पर ट्रंप के अपने ही पुराने साथियों से भिड़ने के कारण नाटो संगठन में बड़ी दरार दिखने लगी है। इसका सीधा फायदा रूस और चीन जैसे देश उठाने की कोशिश कर रहे हैं जो अमेरिकी गद्दी लेना चाहते हैं।
यह थ्योरी केवल तभी काम करती है जब सामने वाला देश कमजोर हो या वह वाकई में बड़ा डर महसूस करे। अगर दुश्मन पक्ष को नेता की चाल का पहले ही पता चल जाए तो यह पूरी मनोवैज्ञानिक रणनीति विफल हो सकती। ट्रंप की यह मनोवैज्ञानिक खेल वाली नीति दुनिया के भविष्य के लिए काफी अनिश्चितता पैदा कर रही है।
Ans: मैडमैन थ्योरी की शुरुआत सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने वियतनाम युद्ध के दौरान अपनी रणनीतियों में की थी।
Ans: क्योंकि ट्रंप अक्सर देशों को युद्ध और टैरिफ की धमकी देकर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं जो इस थ्योरी का हिस्सा है।
Ans: नहीं, वियतनाम ने उनके ब्लफ को समझ लिया था और अंततः अमेरिका को ही अपनी सेना वापस बुलाकर पीछे हटना पड़ा था।
Ans: ट्रंप की इस जिद के कारण उनके पुराने साथी यूरोप और नाटो संगठन के साथ अमेरिका के संबंधों में दरार आ गई।
Ans: आधुनिक सैटेलाइट, सोशल मीडिया और इंटेलिजेंस के कारण अब नेताओं की अप्रत्याशित चालों को समझना और भांपना बहुत आसान हो गया है।






