…तो खत्म हो जाएगा NATO, ट्रंप के धमकी पर भड़की डेनिश PM, ग्रीनलैंड पर दिया दो टूक जवाब
Greenland Dispute: डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेगा, और किसी भी नाटो सदस्य पर अमेरिकी हमला “सब कुछ रुक जाएगा।”
- Written By: अक्षय साहू
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन (सोर्स- सोशल मीडिया)
Danish PM Slams Trump on Greenland: डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर की गई धमकियों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका किसी नाटो देश पर हमला करता है, तो “सब कुछ रुक जाएगा”। यह बयान डेनिश टीवी चैनल DR को दिए गए एक इंटरव्यू में दिया गया। उनके इस बयान के बाद एक बार फिर नाटो देशों और ट्रंप के बीच तनाव को सामने आ गया है।
इंटरव्यू के दौरान उनसे पूछा गया था कि यदि अमेरिका किसी नाटो सदस्य पर बल प्रयोग करता है, तो इसका क्या परिणाम होगा। फ्रेडरिक्सन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर किए गए बयानों की आलोचना करते हुए कहा कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका का दबाव अस्वीकार्य है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ग्रीनलैंड न तो अमेरिका का हिस्सा बनेगा, न ही इसका कोई भविष्य अमेरिका से जुड़ा होगा।
मेटे फ्रेडरिक्सन ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लोग ही करेंगे, और यूरोप में इस बात पर व्यापक सहमति है कि सीमाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। ट्रंप के ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयान के बाद कई यूरोपीय नेताओं ने डेनमार्क का समर्थन किया।
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फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ताकत के बल पर सीमाएं नहीं बदली जा सकतीं, और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने भी कहा कि ग्रीनलैंड का भविष्य डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लोगों का अधिकार है।
क्या था ट्रंप का बयान?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा था कि अमेरिका को ग्रीनलैंड की आवश्यकता है, जिसके जवाब में मेटे फ्रेडरिक्सन ने कहा कि अमेरिका को ग्रीनलैंड को अपने साथ जोड़ने का कोई अधिकार नहीं है और उसे अपने करीबी सहयोगियों को धमकाना बंद करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की कोशिशों के गंभीर और विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं, और इसे वेनेजुएला की स्थिति से नहीं जोड़ा जा सकता है।
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ट्रंप अमेरिका की सुरक्षा की दृष्टि से ग्रीनलैंड को अहम मानते हैं। इससे पहले भी वो ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल किए जाने की वकालत कर चुके हैं। उनका कहना है अगर जरूरत पड़ी तो वो इसके लिए सैन्य कार्रवाई का सहारा भी ले सकते हैं।
