चेरनोबिल में फिर तबाही का डर! 40 साल बाद बढ़ा रेडिएशन का खतरा, रूस के हमले से यूरोप में छाए संकट के बादल
Chernobyl Nuclear Plant:यूक्रेन के चेरनोबिल परमाणु केंद्र पर रूसी हमलों के बाद रेडिएशन का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। ग्रीनपीस ने आंतरिक ढांचे के ढहने की चेतावनी दी है जिससे यूरोप में तबाही मच सकती है।
- Written By: अमन उपाध्याय
सांकेतिक फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Chernobyl Nuclear Plant Radiation: आज से 40 साल पहले यूक्रेन के चेरनोबिल परमाणु केंद्र में दुनिया की सबसे भयानक परमाणु आपदा हुई थी जिसने पूरी मानवता को झकझोर कर रख दिया था। अब, इस त्रासदी की 40वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर एक बार फिर वही डर दुनिया के सामने खड़ा है।
रिपोर्टों के अनुसार, रूसी हमलों के कारण इस परमाणु संयंत्र के सुरक्षा ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है जिससे व्यापक स्तर पर रेडिएशन फैलने का ‘गंभीर खतरा’ पैदा हो गया है।
ग्रीनपीस की चेतावनी
पर्यावरण संरक्षण संगठन ग्रीनपीस ने एक विस्तृत रिपोर्ट जारी कर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आगाह किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चेरनोबिल संयंत्र के भीतर मौजूद ‘आंतरिक विकिरण सेल’ के ‘अनियंत्रित रूप से ढहने’ का जोखिम काफी बढ़ गया है।
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1986 के विस्फोट के बाद जल्दबाजी में बनाए गए स्टील और कंक्रीट के इस ढांचे (सरकोफैगस) की मजबूती तेजी से कम हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसे सालों पहले हटाया जाना था लेकिन यूक्रेन में चल रहे युद्ध के कारण यह काम रुक गया है।
रूसी हमले से सुरक्षा कवच में सुराख
यूक्रेन ने आरोप लगाया है कि 2022 में आक्रमण शुरू करने के बाद से रूस ने इस रणनीतिक स्थल को कई बार निशाना बनाया है। पिछले साल हुए एक हमले में आधुनिक ‘न्यू सेफ कन्फाइनमेंट’ (NSC) की बाहरी परत में छेद हो गया था। हालांकि इसकी मरम्मत की गई है लेकिन इसकी सुरक्षा क्षमता अब भी पूरी तरह बहाल नहीं हो पाई है।
ग्रीनपीस यूक्रेन के सीनियर न्यूक्लियर विशेषज्ञ शॉन बर्नी के अनुसार, सरकोफैगस के अंदर चार टन से अधिक अत्यधिक रेडियोएक्टिव धूल और ईंधन मौजूद है। यदि यह ढांचा ढहता है तो यह धूल पर्यावरण में फैलकर सैकड़ों जान ले सकती है।
रेडियोएक्टिव कण नहीं मानते सरहदें
संयंत्र के निदेशक सेर्गेई ताराकानोव ने स्थिति को बेहद नाजुक बताया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई रॉकेट संयंत्र से 200 मीटर दूर भी गिरता है तो उसका कंपन आंतरिक ढांचे को गिराने के लिए काफी है। उन्होंने दुनिया को याद दिलाया कि 1986 की घटना ने सिखाया था कि रेडियोएक्टिव कण किसी देश की सीमाओं को नहीं मानते और यह पूरे यूरोप के लिए खतरा बन सकता है। सुरक्षा गुंबद की मरम्मत के लिए करीब 4500 करोड़ रुपये (500 मिलियन यूरो) की तत्काल जरूरत बताई जा रही है।
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क्या हुआ था 1986 में?
26 अप्रैल 1986 को तत्कालीन सोवियत संघ के चेरनोबिल में रिएक्टर नंबर 4 में परीक्षण के दौरान मानवीय गलतियों से विस्फोट हुआ था। उस समय तत्काल 31 लोग मारे गए थे लेकिन विकिरण के कारण बाद में हजारों लोगों ने कैंसर जैसी घातक बीमारियों से जान गंवाई और लाखों लोग विस्थापित हुए। आज फिर रूसी मिसाइलों का इस खतरे के ऊपर से गुजरना दुनिया को उसी भयावह मंजर की याद दिला रहा है।
