मौत में मददगार बना ChatGPT? पिता का छलका दर्द, बोले- अगर ये न होता तो मेरा बेटा जिंदा होता
ChatGPT की बजह से अमेरिका में एक किशोर की आत्महत्या का मामला सामने आया है। मामले में किशोर के माता-पिता ने ओपनएआई पर केस दर्ज कराया है। उनका आरोप है कि चैटबॉट ने उनके बेटे को आत्महत्या के तरीके बताए।
- Written By: सौरभ शर्मा
16 वर्षीय मृतक एडम रेन व माता-पिता मारिया और मैट रेन (फोटो- सोशल मीडिया)
ChatGPT Assisted Suicide: अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) चैटबॉट पर अब तक का सबसे गंभीर आरोप लगा है। कैलिफोर्निया के एक परिवार ने चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई पर मुकदमा दायर किया है। उनका कहना है कि इस चैटबॉट ने उनके 16 वर्षीय बेटे एडम रेन को आत्महत्या के लिए उकसाया और उसे इसके तरीके बताए। यह अपनी तरह का पहला मामला है, जहां एक परिवार ने सीधे तौर पर ओपनएआई को अपने बेटे की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है। एडम के पिता मैट रेन का दर्द छलका, उन्होंने कहा, “अगर चैटजीपीटी न होता, तो मेरा बेटा आज जिंदा होता।”
एडम ने सितंबर 2024 में होमवर्क में मदद के लिए चैटजीपीटी का इस्तेमाल शुरू किया था। धीरे-धीरे वह अपनी मानसिक परेशानियों और उलझनों को भी एआई के साथ साझा करने लगा। 11 अप्रैल, 2025 को उसकी मां मारिया रेन ने उसे उसके कमरे में मृत पाया। मौत के कारणों की तलाश में जब पिता ने एडम का फोन खंगाला, तो उनके होश उड़ गए। एडम की चैटजीपीटी हिस्ट्री में महीनों की बातचीत थी, जिसमें उसने अपनी जिंदगी खत्म करने के तरीकों पर खुलकर चर्चा की थी।
चैटबॉट ने हर बात को सही ठहराया
26 अगस्त को सैन फ्रांसिस्को की अदालत में एडेलसन पीसी लॉ फर्म और रेक जस्टिस लॉ प्रोजेक्ट द्वारा दायर मुकदमे में यह आरोप लगाया गया है कि चैटजीपीटी ने एडम के हर नकारात्मक विचार को सही ठहराया। चैटबॉट ने उसे यह महसूस कराया कि आत्महत्या करना नियंत्रण पाने का एक तरीका हो सकता है। बातचीत में चैटबॉट ने एडम से कहा कि चिंता से जूझ रहे कई लोग ‘एस्केप हैच’ यानी बाहर निकलने के रास्ते की कल्पना में सुकून पाते हैं। उसने एडम को अपनी भावनाओं को परिवार से छिपाने में भी मदद की।
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सुरक्षा उपायों पर उठे गंभीर सवाल
मामला सामने आने के बाद ओपनएआई ने ‘टाइम मैगजीन’ को दिए बयान में एडम की मौत पर गहरा दुख जताया। कंपनी ने कहा कि चैटजीपीटी में सुरक्षा उपाय मौजूद हैं, जो संकट के समय हेल्पलाइन की जानकारी देते हैं। हालांकि, कंपनी ने यह भी स्वीकार किया कि लंबी बातचीत में ये सेफ्टी फीचर्स कमजोर पड़ सकते हैं। आईटी विशेषज्ञों का मानना है कि चैटबॉट के साथ यह “आर्टिफिशियल हैप्पीनेस” वाली रिलेशनशिप खतरनाक हो सकती है, जहां शुरुआत में सब कुछ सही लगता है, लेकिन बाद में यह डिप्रेशन की वजह बन सकती है। जेपी मॉर्गन चेज की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 80 करोड़ लोग चैटजीपीटी का इस्तेमाल कर रहे हैं। जिसमें अमेरिका के 70 प्रतिशत किशोर भी इसका इस्तमाल कर रहे हैं।
