
शहबाज शरीफ के पर्यटन सलाहकार यासिर इलियास खान इजराइली पर्यटन महानिदेशक माइकल इजाकोव के साथ (सोर्स - सोशल मीडिया)
Pakistan-Israel Secret Meetings: लंबे समय से इजराइल का विरोध करने वाला पाकिस्तान अब तेल अवीव के करीब आता दिख रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की चर्चाएं गर्म हो गई हैं। हाल ही में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के पर्यटन सलाहकार और सेना प्रमुख ने इजराइली और अमेरिकी अधिकारियों से सीक्रेट और पब्लिक मीटिंग्स की हैं। इन मुलाकातों ने जियो-पॉलिटिकल गलियारों में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पाकिस्तान अमेरिकी डॉलर और गाजा शांति योजना के बदले अपनी दशकों पुरानी नीति बदल देगा। यह बदलाव अगर होता है तो पाकिस्तान इजराइल को मान्यता देने वाला एक और इस्लामिक देश बन जाएगा जिस पर भारत भी कड़ी नज़र रखे हुए है।
पाकिस्तान और इजराइल के बीच सार्वजनिक संपर्क अब लगातार बढ़ रहे हैं, जो पहले कभी नहीं देखा गया था। इसका सबसे ताजा उदाहरण लंदन में हुए ‘वर्ल्ड ट्रैवल फेयर’ मेले में दिखा। यहां प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के पर्यटन सलाहकार यासिर इलियास खान ने इजराइली पर्यटन महानिदेशक माइकल इजाकोव से मुलाकात की। पाकिस्तानी अधिकारी आमतौर पर इजराइली अधिकारियों से सार्वजनिक तौर पर मिलने से बचते रहे हैं।
Surprise Encounter at London Tourism Expo: Israeli–Pakistani Meeting Draws Attention During the WTM Tourism Expo in London, Israel’s Tourism Ministry Director-General Michael Itzhakov was photographed visiting the Pakistan pavilion—a rare moment given that Pakistan and Israel do… pic.twitter.com/qem7OYu0s6 — ME24 – Middle East 24 (@MiddleEast_24) November 14, 2025
इससे पहले भी मिस्र में पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर ने इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद के अधिकारियों के साथ एक सीक्रेट मीटिंग की थी, जिसमें अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के अधिकारी भी मौजूद थे। इसके अलावा सितंबर महीने में न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान शहबाज शरीफ ने खुद अमेरिका में इजराइल के प्रभावशाली लॉबी समूह, अमेरिकन ज्यूइश कांग्रेस के अध्यक्ष डैनियल रोसेन से मुलाकात की थी। दशकों तक इजराइल के खिलाफ नफरत फैलाने के बाद पाकिस्तान का यह रुख अब पूरी तरह से बदलता दिख रहा है।
जियो-पॉलिटिकल हालात इशारा कर रहे हैं कि पाकिस्तान अब इजराइल के साथ संबंध सामान्य करने की राह पर है। माना जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन पाकिस्तान पर अब्राहम समझौते में शामिल होने का दबाव बढ़ा रहा है। अब्राहम समझौता इस्लामिक देशों को इजराइल को मान्यता देने के लिए प्रेरित करता है। अगर पाकिस्तान इस समझौते पर दस्तखत करता है, तो वह इजराइल को मान्यता देने वाला एक और इस्लामिक देश बन जाएगा।
सवाल यह है कि जिस गाजा को लेकर पाकिस्तान पिछले कई सालों से चिंता जताता रहा है क्या वह ट्रंप से मिलने वाले आर्थिक लाभ के लिए इस नीति को छोड़ने जा रहा है? पाकिस्तान गाजा में शांति योजना का भी समर्थन करने पर विचार कर रहा है जिसमें हमास को हमेशा के लिए खत्म करना शामिल है। अटकलें हैं कि पाकिस्तान जल्द ही अब्राहम समझौते 2.0 में शामिल होने के लिए इजराइल के साथ गुप्त बातचीत कर सकता है।
भारत इन घटनाक्रमों पर कड़ी नजर रख रहा है। पाकिस्तान की योजना भविष्य में अमेरिका के कहने पर इजराइल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने की है। पाकिस्तान ने यह भी कहा है कि वह गाजा में हमास से हथियार छीनने के लिए अपनी सेना भेजने पर विचार कर सकता है। इससे पाकिस्तान अमेरिका की दक्षिण-मध्य एशिया योजना में एक प्रमुख स्तंभ के रूप में उभर रहा है। इस योजना में ईरान को घेरना भी शामिल है, जिसके तहत बलूचिस्तान में प्रस्तावित बंदरगाह और खदानों में अमेरिकी सैनिक तैनात किए जा सकते हैं।
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ईरान को काउंटर करने के किसी भी प्रयास से इजराइल को फायदा होगा। पाकिस्तान ने ग्वादर से करीब 100 किलोमीटर दूर पसनी बंदरगाह भी अमेरिका को ऑफर किया है, जिससे ईरान काफी परेशान है। राजनयिक जानकारों का मानना है कि अमेरिका, अफगानिस्तान की तरह बलूचिस्तान में भी सैनिक तैनात कर सकता है जिससे यह क्षेत्र युद्ध का नया मैदान बन सकता है।






