मुहम्मद यूनुस, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Bangladesh Hindu Minority News: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़ी घटनाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण समीक्षा रिपोर्ट सार्वजनिक की है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश में अल्पसंख्यकों के साथ होने वाली अधिकांश घटनाएं सांप्रदायिक द्वेष के कारण नहीं बल्कि सामान्य अपराध की श्रेणी में आती हैं।
मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के कार्यालय से जारी बयान के अनुसार, दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े कुल 645 मामले दर्ज किए गए थे। ये आंकड़े पुलिस रिकॉर्ड, एफआईआर, चार्जशीट और जांच रिपोर्टों के आधार पर संकलित किए गए हैं।
सरकारी समीक्षा के मुताबिक, कुल 645 दर्ज मामलों में से केवल 71 घटनाओं (लगभग 11%) को सांप्रदायिक प्रकृति का माना गया है। इन सांप्रदायिक घटनाओं में मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाना या मूर्तियों के साथ तोड़फोड़ जैसी वारदातें शामिल थीं। वहीं, दूसरी ओर 574 मामलों (लगभग 89%) को गैर-सांप्रदायिक या सामान्य आपराधिक मामलों के रूप में वर्गीकृत किया गया है। सरकार का तर्क है कि इन घटनाओं के पीछे धार्मिक कारण न होकर अन्य व्यक्तिगत या सामाजिक विवाद थे।
रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि जिन मामलों को गैर-सांप्रदायिक बताया गया है, उनके पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण पाए गए हैं:
यूनुस सरकार का कहना है कि ये कानून-व्यवस्था की वे चुनौतियां हैं जो देश के सभी नागरिकों को समान रूप से प्रभावित करती हैं, चाहे वे किसी भी धर्म के हों। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि हर घटना गंभीर है और उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सरकार ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्थलों से जुड़े संवेदनशील मामलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और सैकड़ों मामलों में गिरफ्तारियां भी हुई हैं। रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया कि बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था एक बड़ी चुनौती बनी हुई है जहां हर साल करीब 3000 से 3500 लोगों की मौत हिंसक अपराधों में होती है।
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गौरतलब है कि यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब हाल के दिनों में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की खबरें लगातार आ रही हैं। हाल ही में एक हिंदू व्यापारी की पीट-पीटकर हत्या और एक हिंदू युवक को कार से कुचलने जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं। फिर भी, मोहम्मद यूनुस ने दोहराया है कि सभी समुदायों मुसलमानों, हिंदुओं, बौद्धों और ईसाइयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है।